KORBA : धान बेचने के बाद दोषपूर्ण भुगतान व्यवस्था से निराश हैं अन्नदाता किसान,पाली ब्रांच में मांग अनुरूप कैश की कमी से महज 40 हजार रुपए तक हो रहा भुगतान ! शार्टेज की भरपाई के नाम पर लिए जा रहे अतिरिक्त धान, नीयत पर उठे सवाल ….

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा -पाली। पहले पंजीयन की पेंच,लिमिट कम होने से धान बेचने टोकन की पेचेदिगियों के बाद अब सहकारी बैंक की कोर बैंकिंग शाखाओं में मांग अनुरूप कैश की कमी ने अन्नदाता किसानों को धान के भुगतान के लिए ब्रांच की कई बार दौड़ लगाने मजबूर कर दिया है।हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में दोषपूर्ण भुगतान व्यवस्था की वजह से पाली ब्रांच में पहुंचे जरूरतमंद किसान भी अपने ही बेचे गए धान के पुरा भुगतान के लिए अधिकारियों से मिन्नतें लगाते नजर आए।

यहाँ बताना होगा कि14 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक खरीफ विपणन वर्ष 2025 -26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है।आकांक्षी जिला कोरबा के किसानों में जहां सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के साथ साथ 800 रुपए प्रति क्विंटल की राशि बोनस के तौर पर देकर 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान लेने के वादों पर खरा उतरने से उत्साह है वहीं इस साल एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन से लेकर डिजिटल क्रॉप सर्वे त्रुटिपूर्ण गिरदावरी तकनीकी पेंच बिक्री रकबा में कटौती,लिमिट कम होने से टोकन में परेशानी के बाद अब धान के भुगतान के लिए पर्याप्त नगदी की कमी की वजह से सहकारी बैंकों में कई मर्तबा दौड़ लगानी पड़ रही। 2 जनवरी 2026 तक कि स्थिति में जिले के 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों में 12 लाख 32 हजार 983.20 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 283 करोड़ 58 लाख 61 हजार 360 रुपए की धान खरीदी हो चुकी है। 20 हजार 7 पंजीकृत किसानों के माध्यम से इस धान की आवक हुई है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के 6 कोर बैंकिग शाखाओं के जरिए किसानों को भुगतान किया जा रहा है। साथ ही वितरित एटीएम कार्ड के जरिए भी किसान भुगतान योग्य राशि आहरित कर रहे हैं। लेकिन आकांक्षी जिला कोरबा के पाली ब्रांच में किसानों को किसी दिन 25 तो किसी दिन 40 हजार रुपए तक ही भुगतान नहीं हो रहा है। इससे अधिक की भुगतान योग्य राशि के लिए किसानों को पुनः बैंकों की दौड़ लगानी पड़ रही। हसदेव एक्सप्रेस की पड़ताल में निरधी उपार्जन केंद्र में धान बेचने वाले किसानों एवं भुगतान के लिए ब्रांच पहुंचे जरूरतमंद किसानों ने इस बदइंतजामी पर नाराजगी जाहिर की। विश्वसनीय सूत्रों का कहना था कि ब्रांच में चेहरा देखकर भेंटकर वाले किसानों को 40 हजार रुपए से अधिक की राशि का भुगतान हो रहा । बैंक में आए एक लकवाग्रस्त वयोवृद्ध किसान के साथ पहुंचे उनके पोता किसान सुधलाल धनुहार को भी 1 लाख 19 हजार तक भुगतान योग्य राशि के लिए निकासी पर्ची में महज 40 हजार रुपए तक की ही राशि भरने की बात कही गई।

।हसदेव एक्सप्रेस द्वारा ब्रांच मैनेजर से इस अनदेखी,अव्यवस्था को अवगत कराए जाने के बाद किसान के समस्या की सुध ली गई। ब्रांच मैनेजर रमन कश्यप ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भुगतान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है। प्रतिदिन 4 करोड़ की मांग पर 70 लाख रुपए ही नगद मिल रहा जिसकी वजह से किसानों को व्यवस्थानुरूप 25 से 40 हजार रुपए तक का ही भुगतान हो रहा। हालांकि बीमार व विशेष जरूरतमंद किसानों को राशि की उपलब्धता पर इससे अधिक की राशि भी दे रहे हैं।बहरहाल सहकारी बैंकों में नगदी की किल्लत ने अभी से निराशा और आरोपों का सिलसिला शुरू कर दिया है।

👉 बिना ढलवा किए सीधे समिति की बोरी में पलटी कर खरीदी ,शॉर्टेज के नाम पर ले रहे अतिरिक्त धान

धान खरीदी अभियान
की आदर्श नीति के तहत धान को उपार्जन केंद्र (फड़ )में ढलवा कर ख़रीदी करने का प्रावधान है। साथ ही प्रति बारदाना (धान की बोरी) 40 क्विंटल धान लिए जाने का
प्रावधान है। बारदाना के वजन को जोड़ दिया जाए तो 700 ग्राम अतिरिक्त कुल 40 किलो 700 ग्राम तक धान लिए जाने का
प्रावधान है। लेकिन हसदेव की पड़ताल में पाली ,पोंडी ,लाफा,पोटापानी उपार्जन केंद्र में 40 किलो 850 ग्राम व उससे अधिक
धान लिया गया। फड़ प्रभारी समेत प्रबंधकों ने इसे किसानों की स्वेच्छा से दिया गया धान बताया ।

साथ ही लाफा उपार्जन केंद्र में राइस मिलर्स द्वारा हमाल की व्यवस्था नहीं किए जाने की वजह से धान का उठाव नहीं हो पाने के कारण फड़ में जगह के अभाव में ढलवा न कर किसान के बारदानों से सीधे समिति के स्टेनशिल लगे बारदानों में पलटी करने की बात कही।

किसानों की सुनें 👉

👉 200 क्विंटल तक धान बेच चुका,पूरा होना चाहिए भुगतान

मैं निरधी उपार्जन केंद्र में 100 क्विंटल तक धान बेच चुका हूं,आज 100 क्विंटल धान आज पुनः बेच रहा। लेकिन बैंक में कभी 25 कभी 40 हजार तक कि राशि दी जा रही ,जब पूरा धान बेचे हैं तो भुगतान भी एक साथ होना चाहिए।

जनकराम दास ,पोलमी (तिलईहा)

👉 प्रतिदिन 25 हजार तक ही हो रहा भुगतान ,स्लैब बढ़ाने की दरकार

मैंने भी निरधी उपार्जन केंद्र में 60 क्विंटल से अधिक धान बेचा है लेकिन 25 से 40 हजार तक के भुगतान ने हमारी परेशानी बढ़ा दी है। प्रतिदिन 50 हजार से अधिक भुगतान होना चाहिए।

मदनसिंह पोर्ते ,शिवपुर

👉दादाजी अत्यंत कमजोर ,40 हजार तक की भुगतान से हैं निराश

हमने 68 क्विंटल तक धान बेचा है।ऋण अदायगी के बाद 1 लाख 19 हजार भुगतान योग्य राशि बची है,पर 40 हजार का ही ड्रावल पर्ची भरे जाने की बात कही गई । दादाजी अत्यंत वयोवृद्ध बीमार हैं। एक साथ पूरी राशि का भुगतान होना चाहिए।

👉वर्जन

बैंकों से मांग अनुरूप कम मिल रही कैश ,बीमार ,जरूरतमंदों को उपलब्धताअनुरुप अधिक राशि दे रहे

4 करोड़ नगद की मांग पर 70 लाख ही मिल रहे। इस वजह से उपलब्धतानुरूप भुगतान कर रहे। बीमार व विशेष जरूरतमंदों को उपलब्धता अनुसार अधिक राशि दे रहे। भुगतान पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है।

रमन कश्यप,शाखा प्रबंधक ,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पाली,जिला -कोरबा (छग)