कोरबा। अडानी कोरबा पावर प्लांट (पूर्व लैंको) के प्रस्तावित परियोजनाओं के विस्तार से पहले आसपास के गांवों में विरोध तेज हो गई है। ग्राम पताढ़ी सहित 8 गांवों सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, धनाधनी, संडेल, बरीडीह, खोड़दल और दर्राभांठा के सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्टर एवं पूर्व राजस्व मंत्री को ज्ञापन सौंप साफ चेतावनी दी कि जब तक पुराने वादे पूरे नहीं होंगे, तब तक नई जनसुनवाई या भूमि अधिग्रहण को सहमति नहीं दी जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2005-06 में प्लांट स्थापना के दौरान कंपनी प्रबंधन ने भूमि प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को रोजगार, साथ ही बेहतर चिकित्सा और शिक्षा सुविधाएं देने का वादा किया था। आरोप है कि आज तक केवल जमीन और मकान का मुआवजा दिया गया, लेकिन रोजगार और अन्य सुविधाओं का वादा अधूरा ही रह गया। वर्ष 2012-13 में तीसरी और चौथी इकाई के विस्तार के समय भी यही आश्वासन दोहराए गए, पर स्थिति जस की तस है।

वर्तमान में संयंत्र की क्षमता करीब 1600 मेगावाट बताई जा रही है। अब 5वीं और 6वीं इकाई पर काम शुरू हो चुका है और अतिरिक्त 1600 मेगावाट विस्तार की तैयारी चल रही है। ग्रामीणों का दावा है कि इस विस्तार से लगभग 700 से 750 मकान और 3500 से 4000 की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित होकर विस्थापन की कगार पर पहुंच सकती है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कंपनी प्रबंधन के साथ तत्काल बैठक कर पूर्व में किए गए वादों की स्थिति सार्वजनिक की जाए। प्रत्येक प्रभावित परिवार को रोजगार देने की लिखित और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति को पारदर्शी तरीके से लागू कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक पुराने दायित्वों का निर्वहन नहीं होता, तब तक प्रस्तावित विस्तार प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि वे अपने पुश्तैनी घर, जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण लेकिन मजबूती के साथ लोकतांत्रिक संघर्ष करेंगे। अब नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह ग्रामीणों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है।
