KORBA : SECL दीपका परियोजना अधिग्रहित ग्राम मलगांव में फर्जी मुआवजा और 152 अपात्रों की जांच के लिए डटी CBI ,नोटिस देकर लिया जा रहा बयान

🫵लिपिक मनोज गोभिल परिवार के 5 फर्जी मुआवजा पत्रक की भी पड़ताल जारी, श्यामू जायसवाल पर दर्ज हो चुकी है FIR

कोरबा। एसईसीएल की गेवरा- दीपका परियोजना से प्रभावित ग्राम मलगांव की जमीनों के मुआवजा और बड़े पैमाने पर गलत तरीके से मुआवजा हड़पने तथा फर्जीवाड़ा करने के मामले में सीबीआई की टीम ने एक बार फिर कोरबा में दस्तक दी है।

मिली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सीबीआई की टीम में शामिल एक डीएसपी समेत अन्य अधिकारियों ने गेवरा हाउस में 3 दिन से से अपनी कार्रवाई जारी रखी है।
पूर्व में इस मामले में करोड़ों का फर्जी मुआवजा बिना कोई संपत्ति होते हुए भी जारी करवाने के मामले में सीबीआई ने श्रमिक नेता श्यामू जायसवाल के विरुद्ध अपराध पंजीब्द्ध कर लिया है लेकिन इसके बाद की कार्रवाई अभी लंबित है। इसके बाद काफी दिनों तक मामला ठंडा रहा लेकिन अभी 3 दिन से कोयलांचल में हलचल तेज हुई है।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के अधिकारियों ने उन ग्रामीणों को प्रमुखता से तलब किया है जिनके नाम 152 लोगों की उस सूची में है जिन्हें अन्यान्य कारण से अपात्र बताकर इनका मुआवजा रद्द कर दिया गया है और इन्हें मुआवजा के लिए अपात्र माना गया। इन प्रभावित ग्रामीणों की मानें तो वे लोग वास्तविक हकदार हैं और गांव के पुराने बाशिंदे हैं लेकिन सांठगांठ पूर्वक तथा कुछ जमीन दलालों और फर्जी मुआवजा प्रकरण बनाने- बनवाने वालों से मिलीभगत करके इन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए यह सारा खेल खेला गया।
बहरहाल, एक बार फिर सीबीआई की दस्तक दिए जाने से भूविस्थापितों की आड़ में किए गए मुआवजा घोटाला के मामले में सरगर्मी बढ़ गई है।
बता दें कि इस मामले में प्रशासन के बाबू मनोज गोभिल के परिवार की भूमिका शुरू से संदेह के दायरे में रही है। तत्कालीन अधिकारियों से मिलीभगत करके इसके परिवार के लोगों के नाम से पांच अलग-अलग फर्जी मुआवजा पत्रक बनवाए गए थे जिनमें सत्यापनकर्ता अधिकारियों के हस्ताक्षर भी सील सहित दर्ज थे। मामला उजागर होने के बाद आनन-फानन में उक्त फर्जी पत्रकों को निरस्त कर दिया गया और कोई मुआवजा प्रकरण गोभिल परिवार के नाम से नहीं बनाया गया। लेकिन, यदि समय रहते मामला उजागर नहीं होता तो करोड़ों रुपए का मुआवजा फर्जी तरीके से उठाकर एसईसीएल को बड़ा नुकसान पहुंचाने की साजिश थी। अब चूंकि सारी जांच- पड़ताल सीबीआई के द्वारा की जा रही है तो निगाहें इस ओर है कि संबंधितों की विरुद्ध एफआईआर कब तक दर्ज होगी और संबंधित अपराधी कब तक सलाखोंके पीछे भेजे जाएंगे….?
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के द्वारा मुआवजा पत्रक बनाने वालों से लेकर तत्कालीन राजस्व-एसईसीएल अधिकारियों, तहसीलदारों से लेकर ग्राम कोटवार, भूविस्थापितों के भी बयान दर्ज किये जा रहे हैं। जो उपस्थित नहीं हैं, उन्हें नोटिस देकर बुलाया जा रहा है।बयानों को कलमबंद करने के साथ ही मौका मुआयना भी किया जाकर संभवत:जमीनों की नापजोख भी कराई जा सकती है। कुल मिलाकर सीबीआई की जांच आगे बढ़ने से फर्जीवाड़ा में शामिल लोगों में खलबली मच गई है। फर्जीवाड़ा के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे लोगों में न्याय की उम्मीद जागी है।

सोर्स -सत्यसंवाद डॉट कॉम