नई दिल्ली/रायपुर । विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) की शिक्षा व्यवस्था को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में छत्तीसगढ़ शासन को निर्देश दिया है कि राज्य में विशेष शिक्षकों (Special Educators) की नियुक्ति प्रक्रिया को हर हाल में अगले दो महीने के भीतर पूरा किया जाए। अदालत ने साफ किया है कि जुलाई 2026 में इस आदेश की अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
यह आदेश “राजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य” के मामले में आया है, जिसे प्रदेश में समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ आरसीआई टीचर एसोसिएशन की पैरवी रंग लाई
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला और अधिवक्ता पलाश तिवारी ने मजबूती से पक्ष रखा। एडवोकेट कौस्तुभ शुक्ला ने छत्तीसगढ़ आरसीआई टीचर एसोसिएशन की तरफ से लंबित मामले में हस्तक्षेप आवेदन (Intervention Application) प्रस्तुत किया था, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन को सीधे तौर पर पक्षकार बनाया गया था। वकीलों की विस्तृत पैरवी के बाद अदालत ने राज्य में विशेष शिक्षकों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
👉240 संविदा व मानदेय शिक्षकों को मिलेगा स्क्रीनिंग का मौका

मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि राज्य में वर्तमान में प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) संविदा के आधार पर और माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षक निश्चित मानदेय पर कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और 85 विशेष शिक्षकों (कुल 240) को बड़ी राहत देते हुए निर्देश दिया है कि:
इन सभी कर्मियों को अपने समस्त शैक्षणिक और व्यावसायिक दस्तावेजों के साथ स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष उपस्थित होने का अवसर दिया जाए।
यदि ये अभ्यर्थी भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) द्वारा निर्धारित अनिवार्य योग्यता और अन्य जरूरी पात्रताओं को पूरा करते हैं, तो उनकी नियमित/विधिसम्मत नियुक्ति पर तुरंत विचार किया जाए।
इस पूरी स्क्रीनिंग और नियुक्ति प्रक्रिया को दो माह के भीतर संपन्न किया जाए।
👉स्वीकृत 848 पदों में से कई अब भी खाली
राज्य सरकार द्वारा न्यायालय में दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पदों पर भर्ती के लिए 03 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। हालांकि, आरसीआई (RCI) की गाइडलाइंस के तहत केवल 62 शिक्षकों की ही नियुक्ति हो सकी। शेष 38 पद शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े तकनीकी कारणों और अनिवार्यताओं की वजह से अब भी रिक्त पड़े हुए हैं, जिन्हें भरने के लिए कोर्ट ने गति बढ़ाने को कहा है।
👉जमीनी हकीकत: 49 हजार बच्चे, जरूरत 3,981 शिक्षकों की
सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जमीनी स्थिति पर दुख और चिंता जताई।
👉 आंकड़ों के अनुसार:
छत्तीसगढ़ में इस समय 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग एवं अन्य) बच्चे हैं। आरसीआई और शिक्षा के अधिकार (RTE) के मानकों के अनुसार, इन बच्चों के अनुपात में राज्य को कम से कम 3981 विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है।
न्यायालय ने रेखांकित किया कि जब तक पर्याप्त संख्या में विशेष शिक्षक नहीं होंगे, तब तक गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा का संकल्प अधूरा रहेगा। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप है और दो महीने के भीतर भर्ती व स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी करने का भारी दबाव आ गया है।
