केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सोनम वांगचुक ने बताया लोकतंत्र की बड़ी जीत ,कहा -अब शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बारी …

नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और केंद्र सरकार तथा CJP के बीच सहमति बनने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए सरकार के फैसले का स्वागत किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मंत्री के इस्तीफे से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और स्थायी सुधार ही इस पूरे आंदोलन की वास्तविक सफलता होगी।

एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि आज का दिन उन लाखों छात्रों, युवाओं और नागरिकों की लोकतांत्रिक लड़ाई की जीत का प्रतीक है, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को अनदेखा नहीं किया जा सकता। वांगचुक ने सबसे पहले CJP की टीम को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को सबसे पहले मजबूती से उठाया और लगातार आंदोलन को दिशा दी।

इसके साथ ही उन्होंने उन स्वयंसेवकों, छात्रों, युवाओं और देशभर के नागरिकों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने आंदोलन के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन किया। उन्होंने विशेष रूप से आंदोलन के दौरान शांति बनाए रखने की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत उसका अहिंसक और संयमित स्वरूप होता है। उन्होंने अपील की कि आगे भी इसी भावना को बनाए रखा जाए।

👉’सिर्फ इस्तीफे से नहीं बनेगा देश’

सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा अंत नहीं, बल्कि सुधारों की शुरुआत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य केवल नेतृत्व बदलने से नहीं, बल्कि संस्थाओं को मजबूत करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही लाने से तय होगा।उन्होंने कहा कि अब सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षा प्रणाली में ऐसे सुधार लागू करने की है, जिससे भविष्य में परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों के साथ अन्याय की घटनाएं दोबारा न हों।

👉शिक्षा के साथ शासन व्यवस्था में भी सुधार की जरूरत

वांगचुक ने कहा कि सुधार केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि शासन प्रणाली में भी पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जिस सकारात्मक सोच के साथ इस फैसले तक पहुंची है, उसी भावना के साथ संस्थागत सुधारों को भी आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य भय और टकराव से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ने में है। उनके मुताबिक लोकतंत्र की असली ताकत सत्ता और जनता के बीच भरोसे का रिश्ता है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां विपक्ष इसे छात्रों के आंदोलन और जनदबाव की जीत बता रहा है, वहीं सोनम वांगचुक का बयान इस बहस को एक नया आयाम देता है। उन्होंने राजनीतिक जीत या हार की बजाय संस्थागत सुधारों पर जोर देते हुए संकेत दिया कि आंदोलन का उद्देश्य केवल जवाबदेही तय करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव लाना होना चाहिए। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाती है।