CG : न्यायधानी की हिरासत में संदेहास्पद मौत पर CBI ने दर्ज की FIR ,हत्या की धारा में जांच शुरू,CBI ने मांगी रिपोर्ट ….

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जनवरी 2024 में पुलिस हिरासत में लिए गए श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की मौत के मामले में अब CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद CBI ने यह कदम उठाया है. मामले में हत्या की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया गया है. हालांकि, FIR में फिलहाल आरोपी के तौर पर किसी व्यक्ति का नाम नहीं है और अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ जांच की जा रही है. CBI ने 30 जुलाई 2026 को सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR को अपनी जांच का आधार बनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करे.

जानकारी के मुताबिक ग्राम मोहरा निवासी 35 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी को पुलिस ने 17 जनवरी 2024 को पकड़ा था. अगले दिन पुलिस ने 6 लीटर महुआ शराब के साथ उसकी गिरफ्तारी दिखाते हुए आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. 19 जनवरी को श्रवण को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. अगले दिन परिजन उससे मिलने जेल पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी. इसके बाद 21 जनवरी को जेल में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. पहले उसे जेल अस्पताल ले जाया गया और हालत गंभीर होने पर सिम्स अस्पताल रेफर किया गया. 22 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

👉मौत की वजह को लेकर उठे सवाल

श्रवण की मौत के बाद न्यायिक जांच कराई गई थी. 22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने जांच रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में पोस्टमॉर्टम, हिस्टोपैथोलॉजी और FSL रिपोर्ट समेत कई दस्तावेजों की जांच की गई थी. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, श्रवण के शरीर में किसी तरह का रासायनिक जहर नहीं मिला था. मेडिकल रिपोर्ट में सिर में लगी चोट के बाद कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट को मौत से जोड़ा गया था. अब CBI की जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि श्रवण के सिर में चोट कैसे लगी और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई.

न्यायिक जांच के दौरान श्रवण की पत्नी लहराबाई सूर्यवंशी ने बताया था कि थाना सीपत की पुलिसकर्मी श्रवण को अपने साथ लेकर गए थे. बाद में परिवार को उसके सिम्स अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली और फिर उसकी मौत की सूचना दी गई. श्रवण के पिता अमृतलाल ताम्र ने भी जांच में बताया था कि पुलिस उसे शराब के मामले में अपने साथ लेकर गई थी. बाद में उन्हें जेल से सिम्स अस्पताल भेजे जाने की जानकारी मिली.

👉हिरासत में हिंसा की आशंका पर भी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को स्पष्ट निर्देश दिया है कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जाए. अगर किसी अधिकारी की हिरासत में हिंसा या मौत में भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में उचित कार्रवाई नहीं की.

👉CBI टीम ने जेल और थाने से जुटाए दस्तावेज

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI की चार सदस्यीय टीम बिलासपुर पहुंची थी. SP स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में टीम ने सिविल लाइंस थाने से केस डायरी और दूसरे दस्तावेज हासिल किए. इसके बाद टीम ने सेंट्रल जेल पहुंचकर जेल अधीक्षक और कर्मचारियों से भी पूछताछ की. अब CBI पुलिस रिकॉर्ड, जेल दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट, न्यायिक जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर की सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है. साथ ही राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है. करीब ढाई साल पुराने इस मामले में CBI की FIR के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है. श्रवण की मौत की असली वजह क्या थी, सिर में चोट कैसे लगी और क्या हिरासत में किसी अधिकारी की भूमिका थी—इन सवालों के जवाब CBI की जांच से सामने आने हैं.