हसदेव एक्सप्रेस न्यूज रायपुर । प्रदेश के उद्यानिकी विभाग में मसाला क्षेत्र विस्तार योजना में हल्दी बीज वितरण के नाम पर करोड़ों की कथित अनियमितता भ्रष्टाचार का मामला सोशल मीडिया में उजागर होने की घटना से हड़कम्प मच गया है। साय सरकार ने प्रसारित खबरों पर त्वरित संज्ञान लिया है। आदिम जाति ,कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी ,मछलीपालन पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम के आदेश पर उप सचिव कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने संचालक उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी(छ.ग.)नवा रायपुर को प्रकरण में 7 दिवस के भीतर बिंदुवार परीक्षण कर स्पष्ट
अभिमत के साथ प्रतिवेदन मांगा है। मामले में त्वरित पारदर्शी जांच से जिम्मेदारों पर बड़ी कार्रवाई के आसार हैं।
यहाँ बताना होगा कि उद्यानिकी विभाग में में मसाला क्षेत्र विस्तार योजना में हल्दी बीज वितरण के नाम पर करोड़ों रुपए की कथित अनियमितता का मामला सोशल मीडिया के जरिए बीते माह ही उजागर हुआ था। TRP ( THE RURAL PRESS) ने 12 सितंबर 2026 को प्रमुखता से इस खबर को शासन के संज्ञान में लाया था। इसके अलावा अन्य सोशल मीडिया के जरिए भी यह खबर प्रमुखता से जनमानस के सामने लाई गई थी। TRP ने अपनी खबरों में बिना जीआई टैग वाले अमानक बीजों की आपूर्ति किसानों को कर के 10 करोड़ रुपए की सब्सिडी भी बिना सत्यापन के ही ले लेने का उल्लेख किया था। किसानों की शिकायत के बाद पूरा मामला सामने आने का उल्लेख था। एक पूर्व अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि कई ऐसे किसानों को भी हितग्राही बनाया गया है, जिन्होंने खेत में हल्दी या अदरक की जगह धान की खेती कर रखी है।
हल्दी बीज वितरण के नाम पर करोड़ों की कथित अनियमितता भ्रष्टाचार का मामला सोशल मीडिया में उजागर होने की घटना से हड़कम्प मच गया है। साय सरकार ने प्रसारित खबरों पर त्वरित संज्ञान लिया है। आदिम जाति ,कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी ,मछलीपालन पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम के आदेश पर उप सचिव कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने संचालक उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी(छ.ग.)नवा रायपुर को प्रकरण में 7 दिवस के भीतर बिंदुवार परीक्षण कर स्पष्ट
अभिमत के साथ प्रतिवेदन मांगा है। मामले में त्वरित पारदर्शी जांच से जिम्मेदारों पर बड़ी कार्रवाई के आसार हैं।
👉7 दिवस के भीतर इन बिंदुओं पर अभिमत समेत मांगा जांच प्रतिवेदन


कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग मंत्री श्री रामविचार नेताम के अर्धशासकीय पत्र क्रमाक 823 रायपुर, दिनांक 15-9-2026 के पत्र का अवलोकन कराते हुए संचालक
उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी(छ.ग.)नवा रायपुर को प्रकरण में 7 दिवस के भीतर बिंदुवार परीक्षण कर स्पष्ट
अभिमत के साथ प्रतिवेदन मांगा गया है। शिकायत में उल्लेखित तथ्यों यथा-बीज प्रमाणीकरण, टैग, लॉट, एक्सपायरी डेट की सत्यता, बीज की दरों का औचित्य, वितरित सामग्री की मात्रा तथा बोये गये रकबे का शतप्रतिशत भौतिक सत्यापन, DCS द्वारा रकबे की पुष्टि, नियमानुसार भुगतान आदि का परीक्षण प्रतिवेदन अपने स्पष्ट अभिमत के साथ 07 दिवस के भीतर उपलब्ध मांगी गई है।

👉25 करोड़ की योजना में भ्रष्टाचार की सेंध …
दरअसल, हार्टिकल्चर (उद्यानिकी)विभाग ने किसानों को डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी वाले हल्दी और अदरक के बीज आपूर्ति करने की योजना बनाई। इस पूरी योजना के तहत प्रदेशभर में 25 करोड़ रुपए में 2076 हेक्टेयर में हल्दी और अदरक की खेती करवानी थी। जिसके लिए 10 एजेंसियों के माध्यम से किसानों को बीज मुहैया करवाने का दावा किया गया। लेकिन TRP के सूत्रों के अनुसार बीरगांव की एक ही एजेंसी ने रायपुर से लेकर कोंडागांव, बीजापुर, जगदलपुर सहित कई जिलों में सप्लाई की। इतना ही नहीं, इंदिरा गांधी कृषि विवि की ओर से मानक हल्दी के बीज की कीमत 70 रुपए प्रति किलो के करीब है, लेकिन उक्त एजेंसी द्वारा 46 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बीज की सप्लाई की गई है। जो कि कई शंकाएं पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता के बीज तो मिल ही नहीं सकते।
👉शिकायतों से समझिए, कैसे हुआ खेल?
TRP की खबरों के अनुसार आपूर्ति किए गए अमानक बीजों का ना तो कोई वैधानिक रजिस्ट्रेशन है और ना ही टेंडर-निविदा की शर्तों के तहत किसानों को हल्दी बीज मुहैया कराए गए।आपूर्तिकर्ता संस्था के पास ना तो, बीज तैयार करने की कोई विधिवत व्यवस्था है और ना ही ऐसे बीजों के प्रमाणीकरण को लेकर कोई वैधानिक लाइसेंस। बीज की “रोमा” क़िस्म की आपूर्ति के लिए “फ़र्जी लॉट नंबर” का इस्तेमाल करने का भी आरोप है।
👉एक्सपाइरी डेट गुज़र जाने के बाद भी सप्लाई का आरोप

TRP की खबरों के अनुसार हल्दी मसाला अंकुरण बीज का नियमों के तहत 9 माह की अवधि उपयोग-योग्य बताई जाती है, लेकिन एक्सपाइरी डेट गुज़र जाने के लगभग साल भर बाद हल्दी बीज की प्रदेश भर में आपूर्ति कर किसानों को कर दी गई है। प्रदेश के आधा दर्जन से ज़्यादा जिलों के किसान यह भी तस्दीक कर रहे हैं, कि ना तो उन्हें, हल्दी बीज मुहैया कराया गया और ना ही इस योजना का कोई लाभ मिला, बावज़ूद इसके उनका नाम लाभार्थियों की सूची में डाल दिया गया।
👉जानिए क्या है पूरी योजना?
केंद्र सरकार द्वारा मसाला क्षेत्र विस्तार योजना के तहत किसानों को हल्दी की खेती के लिए प्रेरित करने के लिए यह योजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को न्यूनतम 0.25 हेक्टेयर में खेती के लिए सब्सिडी पर बीज की आपूर्ति किसानों को की जाती है। बीज पर किसानों को प्रति एकड़ 46 गजार रुपए की सब्सिडी दी जाती है, जबकि उर्वरक और दवा के लिए एक हजार रुपए सरकार देती है। इसके लिए किसानों को पहले अनुबंधित संस्थान से बीज खरीदने होते हैं, इसके बाद देयक प्रस्तुत करना होता है, जिसके बाद शासन की ओर से किसानों को राशि वापस की जाती है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत, जबकि 40 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकार की होती है।
👉अधिकारियों का दावा- सिर्फ 1.38 करोड़ का भुगतान
TRP की खबरों के अनुसार शिकायत के दावों के बीच अधिकारी इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि अभी तक 6.22 करोड़ रुपए के लक्ष्य के विरुद्ध 1.38 करोड़ रुपए के भुगतान का दावा किया जा रहा है, लेकिन शिकायत के अनुसार पूरे मामले की सच्चाई कुछ और ही दिखाई पड़ती है।
👉इन जिलों में की गई सर्वाधिक गड़बड़ी
जगदलपुर, कोंडागांव,धमतरी,राजनांदगांव
,दुर्ग,बिलासपुर,अंबिकापुर,
बलरामपुर,जशपुर,महासमुंद जिलों में सबसे ज्यादा फ़र्जीवाड़ा सामने आया है। इन जिलों में असिस्टेंट और डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर (ADH-DDH) स्तर के अधिकारियों ने एक ही संस्था से फर्जी बिल लेकर बग़ैर परीक्षण भुगतान सुनिश्चित करने में देरी नहीं की। जानकारी के मुताबिक, संस्था द्वारा सर्टिफाइड सीड नहीं दिए जाने के बावजूद इन अफसरों ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया।
👉सबसे बड़ा सवाल क्या संचालक जांच में दिखाएंगे तत्परता पारदर्शिता ?

विभागीय मंत्री के निर्देश पर करोड़ों की अनियमितता से जुड़े प्रकरण में जांच के आदेश तो दे दिए गए हैं पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या संचालक तत्परता एवं पारदर्शिता के साथ प्रकरण की जांच सुनिश्चित कराकर स्पष्ट अभिमत समेत प्रतिवेदन भेज पाएंगे?क्या प्रकरण में जिम्मेदार नपेंगे ?क्योंकि संचालक की ही कथित प्रश्रय की वजह से दक्षिण बस्तर- दंतेवाड़ा जिले में
बस्तर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वीकृत कार्य 10 किसानों की भूमि पर तारबाड़ी और नलकूप ड्रिलिंग कार्यों के लिए फर्म मेसर्स ए. जे. वेंचर, रायपुर को बिना सत्यापित व्हाउचर के
20.51 लाख रुपए का धोखाधड़ी पूर्ण फर्जी भुगतान कर महालेखाकार की ऑडिट में पकड़ाईं पूर्व महिला सहायक संचालक पर कार्रवाई नहीं हो सकी है । ऊक्त प्रमाण समेत वित्तीय वर्ष 2025 -26 में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-पॉम ऑयल में
चयनित पात्र 85 कृषक/कृषक समूहों के यहाँ 244 .72 हेक्टेयर (604.45 एकड़)निजी भू -भाग में ड्रिप पंप स्थापना,आरसीसी पोल ,चैनलिंक फेंसिंग से लेकर पौधरोपण कार्य के लिए शासन द्वारा प्रदत्त 9 करोड़ 50 लाख 64 हजार की (विभागीय अनुदान ,डीएमएफ से वहन अंश राशि ) शासकीय अनुदान राशि से लाभान्वित कृषकों से फर्जी कृषक संतुष्टि प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर लेकर उनके खाते में जारी अनुदान राशि को फर्मों के साथ मिलकर बैंक से निकलवाकर बंदरबाट करने वाली पूर्व महिला सहायक संचालक के विरूद्ध हुई प्रधानमंत्री कार्यालय ,मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई दस्तावेजी शिकायत के मामले में दिए गए जांच आदेश में एक साल बाद भी जांच कराकर अभिमत समेत प्रतिवेदन भेजने में नाकाम रहे हैं। संचालक पर भ्रष्ट महिला सहायक संचालक को कथित प्रश्रय से लेकर शिकायती जांच में असक्षम अधिकारी को साल भर तक जांच का जिम्मा देकर लटकाए रखने एवं अचानक जांच अधिकारी बदल प्रकरण में औपचारिकता का निवर्हन किए जाने की शिकायत देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति महोदया तक पहुंच चुकी है। जिसमें शीघ्र ही बड़ी कार्रवाई के आसार हैं।हसदेव एक्सप्रेस इस मामले को प्रमुखता से उठाता आ रहा है। जिसमें जांच उपरांत नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल -पॉम ऑयल योजना में पूरे प्रदेश में हुए भ्रष्टाचार के खुलासे के आसार हैं।
