दिल्ली । भारत की अगली जनगणना को लेकर गृह मंत्रालय ने एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने जनगणना नियम 1990 में संशोधन (Census Amendment Rules 2026) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
इस नए बदलाव के तहत अब केवल सरकारी शिक्षक या राजस्व कर्मचारी ही नहीं, बल्कि प्राइवेट स्कूलों के टीचर, सोसायटियों, ट्रस्टों और गैर-सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों को भी जनगणना अधिकारी (Enumerator) के तौर पर तैनात किया जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव करके निजी स्कूलों के शिक्षकों, संस्थानों, सोसायटी और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के लिए भी एन्यूमरेटर बनने का रास्ता खोल दिया है। गृह मंत्रालय ने 16 अक्टूबर 2026 को जनगणना नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की। सरकार को दूसरे चरण में करीब 34 लाख एन्यूमरेटर की जरूरत है। ऐसे में सवाल है कि कौन यह काम कर सकेगा, जिम्मेदारी क्या होगी, मानदेय कितना मिलेगा और लोगों की निजी जानकारी कितनी सुरक्षित रहेगी?
👉जनगणना 2027 में कौन बन सकता है एन्यूमरेटर?

संशोधित नियमों के तहत अब सरकारी शिक्षण संस्थानों के साथ स्थानीय निकायों, सरकारी सहायता प्राप्त और बिना सरकारी सहायता वाले निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी एन्यूमरेटर बनाया जा सकता है। सोसायटी और ट्रस्ट से जुड़े शिक्षकों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है।
- इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा दूसरे संस्थानों के क्लर्क और अधिकारी भी यह जिम्मेदारी निभा सकते हैं। इस सूची में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, वैधानिक निकाय, बैंक, कंपनियां, संस्थान, सोसायटी और ट्रस्ट भी शामिल हैं।
- नियमों में एक और रास्ता रखा गया है। राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन किसी ऐसे व्यक्ति को भी चुन सकता है, जिसे वह इस काम के लिए उपयुक्त समझे। यानी अब एन्यूमरेटर चुनने के लिए उपलब्ध लोगों का दायरा पहले से बड़ा होगा।
👉एन्यूमरेटर का काम क्या होता है?

- एन्यूमरेटर जनगणना की सबसे अहम कड़ी होते हैं। उनका काम घर-घर जाकर परिवारों से जानकारी लेना, तय सवाल पूछना और जवाबों को सरकारी सिस्टम में दर्ज करना है। इससे देश की आबादी, सामाजिक स्थिति और दूसरी जनसांख्यिकीय जानकारियों का रिकॉर्ड तैयार होता है।
- इस बार जनगणना का दूसरा चरण यानी Population Enumeration कुल 40 सवालों पर आधारित होगा। जानकारी मोबाइल ऐप के जरिए दर्ज की जाएगी। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के बर्फीले इलाकों में दोनों चरणों का काम 30 सितंबर तक पूरा हो चुका था। वहां एक परिवार की जानकारी जुटाने में औसतन 30 से 60 मिनट लगे।
- नए नियमों के मुताबिक अब सरकारी, स्थानीय निकाय, एडेड या अन-एडेड प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक, सरकारी/प्राइवेट कंपनियों, बैंकों, ट्रस्टों व सोसायटियों के क्लर्क व कर्मचारी और राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त समझा जाने वाला कोई भी व्यक्ति इस जिम्मेदारी के लिए पात्र होगा।
- पर्वतीय और दुर्गम इलाकों में प्रति परिवार 30 से 60 मिनट का समय लग रहा है। इस काम के लिए तय मानदेय और प्रशासनिक भत्ते नियमों के तहत दिए जाते हैं।
👉कितनी मिलेगी सैलरी या मानदेय?
एन्यूमरेटर बनने में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह बड़ा सवाल है। लेकिन उपलब्ध अधिसूचना और दिए गए विवरण में इस काम के लिए मानदेय या सैलरी की कोई तय रकम नहीं बताई गई है। इसलिए अभी किसी निश्चित राशि का दावा करना सही नहीं होगा।
नए नियम पात्रता का दायरा बढ़ाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर योग्य व्यक्ति को अपने आप नियुक्ति मिल जाएगी। किसे चुना जाएगा, इसके लिए संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन फैसला करेगा। इच्छुक लोगों को नियुक्ति से जुड़ी आधिकारिक सूचना और शर्तें देखनी चाहिए।
👉जनगणना कब होगी और कितने सवाल पूछे जाएंगे?
पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने का काम यानी House Listing Operations (HLO) होगा। दूसरे चरण में घर-घर जाकर आबादी की जानकारी जुटाई जाएगी। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में यह काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक प्रस्तावित है। बाकी देश में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी।
इस बार जनगणना डिजिटल तरीके से की जाएगी। स्वतंत्र भारत में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से अलग जातियों की गणना भी पहली बार इस जनगणना का हिस्सा होगी।
- 14 अगस्त को जारी 40 सवालों की सूची में 2011 की जनगणना के मुकाबले 13 नए सवाल या डेटा फील्ड जोड़े गए। इनमें पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, माता-पिता का विवरण, डिजिटल साक्षरता, स्थायी निवास का पता, कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की संख्या, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस की जानकारी शामिल है। मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी की जानकारी भी उपलब्ध होने पर पूछी जा सकती है।
मोबाइल ऐप में दर्ज डेटा कितना सुरक्षित रहेगा? - निजी क्षेत्र के लोगों को जनगणना के काम में शामिल करने से डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। खासकर तब, जब एन्यूमरेटर अपने मोबाइल फोन पर ऐप के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे।
- एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि डेटा केंद्रीय सर्वर पर जमा होता है और उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी जांच की व्यवस्था है। काम पूरा होने के बाद एन्यूमरेटर के फोन से डेटा हटा दिया जाता है। हालांकि, लोगों को अपनी जानकारी देते समय यह देखना चाहिए कि वे अधिकृत जनगणना कर्मचारी से ही बात कर रहे हैं।
👉34 लाख कर्मचारियों की जरूरत और चुनावी राज्यों का शेड्यूल
रिपोर्ट के मुताबक 40 सवालों वाली इस जटिल जनसंख्या गणना को केवल सरकारी शिक्षकों के भरोसे तय समय में पूरा नहीं किया जा सकता था।
- देश के चार चुनावी राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में यह डोर-टू-डोर अभियान 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक चलेगा, क्योंकि इसके बाद वहां विधानसभा चुनाव और सरकारी शिक्षकों की इलेक्शन ड्यूटी शुरू हो जाएगी। बाकी पूरे देश में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में संचालित की जाएगी।
👉प्राइवेट शिक्षकों को लेकर विवाद क्यों हुआ?
निजी शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर लगाने का फैसला पहले ही कानूनी चुनौती का सामना कर चुका है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा में कुछ निजी शिक्षकों ने इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
16 अक्टूबर को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार के उन दो पत्रों पर रोक लगा दी, जिनके जरिए जनगणना के लिए शिक्षकों का ब्योरा मांगा गया था। इससे निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को अंतरिम राहत मिली।
इससे पहले मई में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के 500 से ज्यादा निजी और अल्पसंख्यक स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने ड्यूटी पर नहीं पहुंचने वाले शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के खिलाफ जारी नोटिस, नियुक्ति आदेश और FIR जैसी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने निजी लोगों को एन्यूमरेटर बनाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी के सदस्यों के लिए रोजगार योजना जैसा दिखता है। यह उनका राजनीतिक आरोप है, सरकार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
👉जनगणना का कानूनी आधार क्या है?
भारत में जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 और उससे जुड़े नियमों के तहत होता है। जनगणना नियम, 1990 में पहले से “किसी भी व्यक्ति” को एन्यूमरेटर नियुक्त करने का प्रावधान था, लेकिन अब नई अधिसूचना ने पात्र लोगों की श्रेणियां स्पष्ट रूप से बढ़ा दी हैं।
एक पूर्व जनगणना अधिकारी के मुताबिक, निजी लोगों को इस तरह शामिल करने की पहले कोई मिसाल नहीं थी। 1991 की जनगणना के लिए भी ऐसा सुझाव दिया गया था, लेकिन जवाबदेही से जुड़ी चिंताओं के कारण उसे स्वीकार नहीं किया गया था।
इस बार जनगणना की समयसीमा के साथ एक और चुनौती है। दूसरे चरण का काम स्कूलों और बोर्ड परीक्षाओं के आसपास होगा। चुनाव वाले राज्यों में दिसंबर से जनवरी तक गणना पूरी होने के बाद विधानसभा चुनाव भी होने हैं, जिनमें सरकारी शिक्षक चुनाव ड्यूटी में लगाए जा सकते हैं। सरकार के सामने अब ज्यादा लोगों को जोड़ने के साथ उनकी ट्रेनिंग, जवाबदेही और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती भी रहेगी।
