KORBA : 6 साल के मासूम की हृदयविदारक मौत ,अनहोनी की आशंका से आक्रोश, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने भरी हुंकार …

कोरबा।3 साल, बेहाल कोरबा! अपराध, असुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर उठते सवालों के बीच रजगामार से आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घर के पास दुकान से सामान लेने निकली करीब 6 साल की मासूम बच्ची लापता हो गई और तीन दिन बाद उसका शव घर से कुछ ही दूरी पर पेड़ के पास मिलने की जानकारी सामने आई। इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक, आक्रोश और भय का माहौल है। सवाल यह है कि आखिर मासूम की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके परिवार को न्याय कब मिलेगा?

जानकारी के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को रजगामार क्षेत्र की करीब छह वर्षीय बच्ची घर के पास स्थित दुकान से सामान लेने गई थी। इसके बाद वह लापता हो गई। परिजनों और क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का दौर शुरू हुआ। 22 अक्टूबर को बच्ची का शव घर से कुछ ही दूरी पर एक पेड़ के पास बरामद होने की जानकारी मिली। शव को जिला चिकित्सालय, कोरबा की मर्चुरी में रखे जाने और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया प्रस्तावित होने की बात सामने आई है।
मासूम की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इलाके में हर कोई इस सवाल का जवाब जानना चाहता है कि बच्ची के साथ आखिर हुआ क्या था?

👉यौन अपराध और हत्या की आशंका, जांच से खुलेगा राज

घटना की परिस्थितियों को लेकर लोगों के बीच गंभीर आशंकाएं जताई जा रही हैं। बच्ची के साथ यौन अपराध के बाद हत्या किए जाने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। हालांकि, अभी इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। मौत की वास्तविक वजह और किसी संभावित अपराध की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।

ऐसे संवेदनशील मामले में जरूरी है कि पुलिस हर पहलू की गंभीरता से जांच करे, साक्ष्यों को सुरक्षित रखे और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।

👉पीड़ित परिवार से मिले क्रांति सेना और सतनामी समाज के प्रतिनिधि

22 अक्टूबर को छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला अध्यक्ष, प्रदेश संयोजक और अन्य सदस्यों के साथ सतनामी समाज के प्रतिनिधि पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। प्रतिनिधियों ने परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और परिवार को न्याय दिलाने तथा मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस घटना ने सामाजिक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें पुलिस की जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

👉’अब और नहीं’, कानून-व्यवस्था पर जवाबदेही की मांग’

‘3 साल, बेहाल कोरबा: अपराधियों का तांडव, प्रशासन मौन!’ और ‘अब और नहीं, चरमराई कानून-व्यवस्था के खिलाफ प्रचंड हुंकार!’ जैसे नारों के जरिए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला यह संदेश अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन सकता है।

हालांकि, किसी भी संगठन के आरोप या राजनीतिक नारे अपने आप में प्रशासन की विफलता का प्रमाण नहीं हैं। लेकिन मासूम बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत जैसे गंभीर मामले में जनता के सवालों का जवाब देना और जांच की प्रगति को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी है।