कोरबा ।आकांक्षी जिला कोरबा में ‘रीपा’ (ग्रामीण औद्यांगिक पार्क) के संरचना (गोदाम) निर्माण में अनियमितता एवं औद्योगिक इकाई स्थापित करने शासन के नियमों के विपरीत स्व सहायता समूहों को गुमराह कर फर्मों रामसा प्रा.लि. एलॉयड रायपुर (छ.ग.) एवं ब्रिटिश इंडिया कंपनी कोरबा के माध्यम से आपूर्ति किए गए करोड़ों रूपए के मशीनी सामग्रियों की भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता, क्रय, भुगतान प्रक्रिया की व्यापक लोकहित में राज्य स्तरीय टीम से जाँच कराकर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने संबंधी शिकायत में सुशासन का दावा करने वाली साय सरकार दस्तावेजी शिकायत के उपरांत भी जांच पर जांच आदेश निकाल कागजी औपचारिकता का निर्वहन कर रही। जी हां 25 अगस्त को कमिश्नर बिलासपुर द्वारा कलेक्टर को जांच के आदेश दिए जाने के डेढ़ माह बाद भी जांच नहीं होने पर अब सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी ,जिला – पंचायत कोरबा को जांच का आदेश दिया है।
यहाँ बताना होगा कि मुख्य सचिव छग शासन को 24 जनवरी 2024 को आकांक्षी जिला कोरबा में ‘रीपा’ (ग्रामीण औद्यांगिक पार्क) मे हुई अनियमिता के मामले में व्यापक लोकहित में राज्य स्तरीय टीम गठित कर 30 दिवस के भीतर प्रकरण की जांच का अनुरोध किया गया था। पत्र के माध्यम से आकांक्षी जिला कोरबा में ‘रीपा’ (ग्रामीण औद्यांगिक पार्क) के संरचना (गोदाम) निर्माण में अनियमितता एवं औद्योगिक इकाई स्थापित करने शासन के नियमों के विपरीत स्व सहायता समूहों को गुमराह कर फर्मों रामसा प्रा.लि. एलॉयड रायपुर (छ.ग.) एवं ब्रिटिश इंडिया कंपनी कोरबा के माध्यम से आपूर्ति किए गए करोड़ों रूपए के मशीनी सामग्रियों की भौतिक सत्यापन, गुणवत्ता, क्रय, भुगतान प्रक्रिया की व्यापक लोकहित में राज्य स्तरीय टीम से जाँच कराकर जिम्मेदारों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने का अनुरोध किया गया था, जिसमें कांग्रेस शासनकाल में स्वीकृत ‘रीपा’ योजना में हुई तमाम अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए फर्म के शेष भुगतान पर तत्काल रोक लगाते हुए राज्य स्तरीय टीम से प्रकरण की व्यापक लोकहित में जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारी / कर्मचारियों का चिन्हांकन कर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया गया था ।
करीब डेढ़ साल बाद साय सरकार को प्रकरण में जांच की सुध आई। शिकायतकर्ता को
07.08.2026 को प्रातः 12:00 बजे कार्यालय उपसंचालक, जिला पंचायत कोरबा में उक्त शिकायत के संबंध में आवश्यक साक्ष्य दस्तावेज सहित उपस्थित होना सुनिश्चित करने का लेख था।
जबकि प्रेषित शिकायत पत्र में प्रकरण की राज्य स्तरीय टीम से जांच का अनुरोध किया गया था जिसे न केवल जिला स्तर पर दिया गया वरन् प्रकरण में निचले स्तर के अधिकारी जो प्रकरण की जांच हेतु सक्षम नहीं हैं उन्हें जांच का जिम्मा सौंपकर जांच प्रक्रिया के नाम पर औपचारिकता का निर्वहन किया जा रहा था । प्रेषित शिकायत पत्र में तत्कालीन जिला पंचायत सी.ई.ओ. (मुख्य कार्यपालन अधिकारी) श्री नूतन कंवर एन.आर.एल.एम. के जिम्मेदार अफसरों के भूमिका पर सवाल उठाए गए थे, निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद जिला पंचायत सी.ई.ओ. के अधीनस्थ अधिकारी उपसंचालक पंचायत- कोरबा को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जो कि शासन के निर्धारित नियमों के सर्वथा विपरीत था । एक कनिष्ठ अधिकारी अपने से वरिष्ठ अधिकारी के संदर्भ में प्राप्त शिकायती प्रकरणों की जांच नही कर सकते।
पूरे प्रकरण में जिला पंचायत व एन.आर.एल.एम. शाखा के जिम्मेदार अधिकारी / कर्मचारियों की संलिप्तता परिलक्षित हो रही थी। लिहाजा शिकायतकर्ता ने
गंभीर प्रकरण में उपरोक्त पहलुओं को देखते हुए उपसंचालक पंचायत के पत्र व्यवहार पर अपना पक्ष नहीं रखा व बयान नहीं दिया।
शिकायतकर्ता ने प्रकरण की जांच सक्षम अधिकारियों से न कराकर निचले स्तर के अधिकारी कार्यालय उपसंचालक पंचायत, जिला पंचायत कोरबा (छ.ग.) को जांच का जिम्मा सौंपकर औपचारिकता का निर्वहन किए जाने जिम्मेदारों को संरक्षण प्रदान किए जाने के मामले में नियमानुसार कार्यवाही के लिए 07 अगस्त को ही मुख्य सचिव छग शासन को पत्र लेख किया था। जिसकी प्रतिलिपि सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ,कार्यालय मिशन संचालक, एसआरएलएम प्रकोष्ठ,
कार्यालय कमिश्नर महोदय, बिलासपुर संभाग, बिलासपुर
, कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी महोदय, जिला कोरबा ,कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा (छ.ग.) की ओर प्रेषित की गई थी।
👉कमिश्नर के जांच आदेश कलेक्टर ने डेढ़ माह से लटकाया ,अब जिला सीईओ को जिम्मेदारी

जिसमें कमिश्नर कार्यालय ने कलेक्टर कोरबा को 25 अगस्त को ही प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर आवेदक एवं अधोहस्ताक्षरकर्ता कार्यालय को अवगत कराने का लेख किया था। लेकिन जिला प्रशासन ने कमिश्नर के पत्र को कोई तवज्जो नहीं दी। प्रकरण में आज पर्यन्त सक्षम अधिकारी को जांच की जवाबदारी नहीं सौंपी गई। इस बीच अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का 13 अक्टूबर को जारी पत्र प्राप्त हुआ है। अवर सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अब प्रकरण की जांच का जिम्मा जिला पंचायत सीईओ को सौंपी है। जो पूर्व जिला पंचायत सीईओ के कार्यकाल में हुई अनियमितता की जांच करेंगे। अब यह देखना लाजिमी होगा कि अबकी बार जांच होती है या फिर लेटर लेटर का खेला खेल आम जनता को दस्तावेजी शिकायत के बावजूद डबल इंजन की इस सरकार में न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

👉10 करोड़ से अधिक के भुगतान लंबित होने की चर्चा ,बदल गई योजना की गाइडलाइंस


उपरोक्त कार्य मनरेगा के तहत कराए गए थे। सत्ता परिवर्तन होते ही मनरेगा का स्वरूप नाम भी बदल गया। नए दिशा निर्देश ,नियमावली लागू हो गए हैं ,जिसके तहत अब लंबित भुगतान पर पूर्णतः रोक लग गई है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो तकरीबन 10 करोड़ का बकाया लंबित है।जिसकी भुगतान करने के लिए जांच को आनन फानन में निबटाने की कवायद चल रही थी। जिसमें मंसूबे कामयाबी नहीं हो सके ।
