कोरबा । जिले के जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत गीतकुंवारी के लबेद नाला पर प्रस्तावित नए बांध के निर्माण को लेकर आक्रोशित ग्रामीण लामबंध हो गए हैं। मशीनों के माध्यम वन विभाग के प्रस्तावित नए बांध से 7 दशक पुराने पारंपरिक बांध के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को भांपते हुए खेतों की सिंचाई और आजीविका को लेकर चिंतित ग्रामीण बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर नए बांध के निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि लबेद नाला पर लगभग 70 से 80 वर्ष पूर्व उनके पूर्वजों द्वारा पारंपरिक रूप से एक मेड़ (बांध) का निर्माण किया गया था। इस जल संरचना की देखरेख और मरम्मत ग्रामीण स्वयं समय-समय पर करते आ रहे हैं। इसी बांध में एकत्रित पानी से ग्राम गीतकुंवारी के लगभग 1200 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। ग्रामीणों के अनुसार खेती ही उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के गीतकुंवारी बीट क्षेत्र में पुराने बांध से लगभग 500 मीटर नीचे ग्राम गिरारी की ओर मशीनों के माध्यम से नए बांध का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि नए बांध के निर्माण से जलभराव की स्थिति उत्पन्न होगी और उनका वर्षों पुराना पारंपरिक बांध प्रभावित होकर डूब सकता है। यदि ऐसा हुआ तो 1200 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुराने जलस्रोत और सिंचाई व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है, तो किसानों के सामने खेती और परिवार के भरण-पोषण का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। इसी चिंता को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्या रखी है।
शिकायत की प्रतिलिपि राजस्व विभाग, वन विभाग और जल संसाधन विभाग को भी सौंपी गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कराई जाए, मौके का निरीक्षण किया जाए और नए बांध के निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन को 3 से 4 दिनों के भीतर समस्या का निराकरण करने की मांग करते हुए कहा है कि उनकी वर्षों पुरानी सिंचाई व्यवस्था और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर उचित निर्णय लिया जाए।
अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन ग्रामीणों की इस शिकायत पर क्या कदम उठाती है।
