जांजगीर-चाम्पा। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, चांपा में कार्यरत कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक रंजीत कुमार अनंत को एसपी विजय कुमार पांडेय ने निलम्बित कर दिया है। उसके विरूद्ध तीन हजार रूपये की रिश्वत मांगने, फोन-पे के माध्यम से 1000 रूपये लेने एवं दुर्व्यवहार करने संबंधी गंभीर शिकायत प्राप्त हुई थी। प्रथम दृष्ट्या शिकायत पत्र की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरक्षक अनंत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केन्द्र जांजगीर- चांपा संबद्ध किया गया है।आरक्षक को नियमानुसार निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

👉 एसपी से की गई है यह शिकायत
अकलतरा सिविल कोर्ट की अधिवक्ता प्रिंयका ने जिला पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी कि 2 जनवरी को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चांपा में थाना बिर्रा अपराध क्र. 173/2025 का अभियोग पत्र प्रस्तुत होना था जिसकी जमानत के लिए वह अरोपी हनुमान निषाद के पैरवी हेतु गयी थी। वहां अरोपी हनुमान निषाद का न्यायालय से जमानत करवाना था। अधिवक्ता द्वारा न्यायालय में जाकर आरक्षक रंजित कुमार आंनत से पुछने पर कि अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हो गया है, जिस हेतु जमानत के लिए स्वयं का मुचलका करवाना है। तब रंजित कुमार ने इसमें जमानतदार लगेगा कहने लगा। इसके बाद न्यायालय के बाहर में अधिवक्ता से कहा कि जमानतदार नहीं है फिर भी कोई बात नहीं, बिना जमानतदार के मैं करवा दूंगा मेरा जुगाड़ है। अधिवक्ता ने उक्त अभियोग पत्र को मजिस्ट्रेट के समक्ष रख दो, मैं स्वयं के मुचलके पर जमानत हेतु बात कर लूंगी कही तब आरक्षक के द्वारा उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी काम हो जायेगा कहा गया। जमानत हो जाने के पश्चात रंजित कुमार ने चांपा कोर्ट के सामने कहा कि, मैडम तुम्हारा काम हो गया है अब नया साल का खर्चा-पानी दोगे, तुम्हारा एक ही दिन में जमानत और वाहन सुपुर्दनामा करा दिया हूं। किस बात का खर्चा पानी दूं कहने पर कहा कि अब तुम्हारा काम हो गया है, अब तो तुम ऐसा बोलोगे ही। क्या खर्चा-पानी दूं कहने पर बिना जमानतदार के काम किये हैं तो कम से कम 3 हजार रूपये देने की बात कहा। पूरा काम तुम्हारा कर दिया हूं, अभी एक हजार रुपये दो कह कर बदतमीजी से बात करने लगा। कैश पैसा नहीं है, कहने पर आरक्षक के द्वारा फोन-पे तो होगा ही एक नंबर बताता हूं उसमें भेज दो कहा। शाम लगभग पौने 6 बजे उसके बताये हुए मोबाइल नंबर पर एक हजार रूपये फोन-पे की। बाकी पैसा फिर आओगे तो दे देना, कह कर आरक्षक चला गया।
