KORBA : RMSA के 100 सीटर पोंडीउपरोड़ा गर्ल्स हॉस्टल में भूत प्रेत की अफवाहों पर विराम ,प्रशासन ,स्वास्थ्य विभाग की जांच में 3 छात्राएं पाई गईं स्वास्थगत कमजोर ,एग्जाम स्ट्रेस से हैं परेशान

0 भूत-प्रेत से सशंकित अनुपस्थित छात्राओं के घर जायेंगे अधिकारी

कोरबा-पोड़ी उपरोड़ा। जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में स्कूल शिक्षा विभाग के आरएमएसए द्वारा संचालित 100 सीटर कन्या छात्रावास में छात्राओं की तबीयत बिगड़ने, भूत-प्रेत की आशंका पर बैगा बुलाने की खबर सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रशासन स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंच जांच उपरांत इन अटकलों पर विराम लगा दिया। जांच में स्वास्थयगत दिक्कतों से जूझ रहीं 3 से 4 छात्राएं स्वास्थय कारणों एग्जाम स्ट्रेस की वजह से बेहोश ,भयभीत हो रही हैं।

गौरतलब हो कि जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में स्कूल शिक्षा विभाग के आरएमएसए द्वारा संचालित 100 सीटर कन्या छात्रावास में छात्राओं तबीयत बिगड़ने, भूत-प्रेत की आशंका पर बैगा बुलाने की खबर मीडिया में सार्वजनिक होने के बाद हड़कम्प मच गया था। प्रशासन ने इसे बेहद संजीदगी से लिया। पोंडीउपरोड़ा एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने तहसीलदार विनय देवांगन, नायब तहसीलदार सुमन दास मानिकपुरी एवं स्वास्थ्य विभाग की सँयुक्त टीम बनाकर तत्काल जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम ने शुक्रवार को हॉस्टल पहुंचकर छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच दल में डॉ. अविनाश कश्यप भी शामिल रहे।
स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अधिकांश बच्चियों की स्थिति सामान्य पाई गई, वहीं कुछ छात्राओं में निमोनिया जैसी शिकायत सामने आई है। तहसीलदार विनय देवांगन ने संबंधित छात्राओं के बेहतर उपचार के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों के अनुसार कमजोरी और मानसिक दबाव के कारण बच्चों में इस प्रकार के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो आम लोगों को असामान्य व्यवहार प्रतीत होते हैं। बताया जा रहा है कि बीते कुछ दिनों से 10 से 12 छात्राओं की तबीयत बिगड़ने और असामान्य हरकत करने की बातें सामने आ रही थीं। सूचना मिलने पर परिजन हॉस्टल पहुंचे। कुछ परिजनों ने इसे भूत-प्रेत का साया मानते हुए बैगा (झाड़-फूंक करने वाले) को भी साथ लाकर उपचार कराने की कोशिश की थी। स्थिति को देखते हुए कुछ परिजन अपनी बच्चियों को घर ले गए हैं। कई अभिभावकों ने भयवश बच्चों को वापस गांव ले जाकर घर से ही परीक्षा दिलाने का निर्णय लिया है।
मामले में एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने कहा कि जो छात्राएं घर गई हैं, उनसे भी मुलाकात कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली जाएगी तथा परिजनों के मन में चल रही भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन और स्वास्थ्य अमला लगातार निगरानी बनाए हुए है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अंधविश्वास से दूर रहें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं। जानकारों के अनुसार परीक्षा के समय मानसिक दबाव, घबराहट और शारीरिक कमजोरी के कारण भी बच्चों में इस प्रकार के लक्षण उभर सकते हैं। ऐसे में आवश्यक है कि छात्राओं के स्वास्थ्य और भविष्य को प्राथमिकता देते हुए उचित चिकित्सा और परामर्श उपलब्ध कराया जाना चाहिए।