बिहार । पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ रेप और संदिग्ध मौत के मामले ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह कोई अचानक बिगड़ी तबीयत या आत्महत्या का मामला नहीं, बल्कि लंबे समय तक चली दरिंदगी और यौन हिंसा का नतीजा है। रिपोर्ट के अनुसार छात्रा करीब डेढ़ से दो घंटे तक अपने साथ हुई हैवानियत का विरोध करती रही।
👉पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बताई संघर्ष की पूरी कहानी
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक छात्रा के शरीर पर कई गंभीर और ताजा चोटें पाई गई हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट लिखा है कि ये सभी चोटें मौत से पहले की हैं।
यानी छात्रा ने आखिरी सांस तक खुद को बचाने की कोशिश की। यही चोटें उसकी चीख, उसका संघर्ष और उसकी पीड़ा की मूक गवाही दे रही हैं।
👉गर्दन और कंधे पर नाखून के गहरे निशान

रिपोर्ट में गर्दन और कंधे के आसपास Crescentic Nail Abrasions यानी नाखून से बने गहरे घाव दर्ज किए गए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार ऐसे निशान तभी बनते हैं, जब पीड़िता हमलावर से छूटने की कोशिश करती है और आरोपी उसे जबरन पकड़ता या दबाता है। यह साफ संकेत है कि छात्रा ने हार नहीं मानी, बल्कि लगातार विरोध किया।
👉चेस्ट पर नोचने के निशान
पोस्टमार्टम में छात्रा की छाती और कंधे के नीचे Multiple Scratch Marks पाए गए हैं। ये खरोंच एक जगह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फैली हुई हैं।
मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति तब बनती है, जब पीड़िता को लंबे समय तक जमीन या किसी कठोर सतह पर दबाया गया हो या नाखून से नोचा गया हो।
👉पीठ पर नीले निशान, संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं था
रिपोर्ट में पीठ के हिस्से पर कई bruises यानी नीले निशान भी दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि छात्रा की पीठ को बार-बार कठोर सतह से रगड़ा गया।
डॉक्टरों की राय में यह संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं, बल्कि लंबे समय तक चला है। इसी आधार पर यह आशंका भी जताई जा रही है कि वारदात में एक से अधिक लोग शामिल हो सकते हैं।
👉प्राइवेट पार्ट में गंभीर चोट, जबरन रेप की पुष्टि
पोस्टमार्टम का सबसे अहम हिस्सा Genital Examination है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि छात्रा के प्राइवेट पार्ट में ताजा और गंभीर चोटें पाई गई हैं।
Vaginal area में गहरी रगड़ के निशान हैं और काफी ब्लीडिंग हुई है। मेडिकल बोर्ड की स्पष्ट राय है कि ये चोटें सहमति से बने संबंध की नहीं, बल्कि forceful penetration का परिणाम हैं।
👉मेडिकल ओपिनियन: यह यौन हिंसा का मामला है
डॉक्टरों ने अपनी राय में साफ लिखा है कि शरीर के अन्य हिस्सों पर संघर्ष के निशान यह साबित करते हैं कि छात्रा बेहोश नहीं थी।
वह पूरी तरह होश में थी और खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। रिपोर्ट के अंत में स्पष्ट किया गया है कि पाए गए सभी तथ्य sexual violence के अनुरूप हैं। मौत के अंतिम कारण को लेकर विसरा सुरक्षित रखा गया है, जिसे आगे की जांच के लिए एम्स भेजा गया है।
