0 स्व . हर प्रसाद जायसवाल जी के वार्षिक श्राद्ध निमित्त आयोजित कथा से पोंडीबहार में बह रही भक्ति की बयार …
हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा ।जिस तरह जीवन में सफल होने के लिए अपने आप को आग में तपाना पड़ता है ,उसी तरह अमृत पीने का अधिकार उसी को मिलता है जो स्वयं के भीतर विष को पचाने की क्षमता रखता हो ,तात्पर्य है कि संसार में सफल वही होगा जो संसार की बुराइयों को सुनकर ठोकर खाकर भी अपने आप को संभालकर रखेगा। उक्त बातें पहरिया से पधारे विख्यात कथावाचक पं.सौरभ शर्मा ने स्व . हर प्रसाद जायसवाल जी के वार्षिक श्राद्ध निमित्त गृह ग्राम पोंडीबहार में गृह निवास सत्य नारायण मंदिर के सामने सावित्री जायसवाल एवं समस्त जायसवाल (पांडे)परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत कथा महापुराण ज्ञान यज्ञ के चौथे दिवस समुद्र मंथन कथा प्रसंग के दौरान कही।


पंडित श्री शर्मा ने श्रोताओं को कथा अमृत का रसपान कराते हुए कहा कि अमृत से भी अधिक शक्ति वेदमन्त्रों में होती है , मुकाबले की स्थिति निर्मित होने पर अमृतपान करने वाले पर वेदमंत्र धारक की विजय तय है , बशर्ते वेदमंत्र का ज्ञाता गायत्री मंत्र का साधक हो। विख्यात कथावक्ता श्री शर्मा ने श्रोताओं को बताया कि देवादिदेव महादेव इस जगत में सर्वप्रथम अमृतपान करने वाले हैं ,हलाहल विषपान से पूर्व वो करोड़ों वेद मंत्रों में से एक राम नाम रूपी अमृत का पान कर चुके हैं। रामनाम रूपी अमृत का पान कर चुके भोलेनाथ जगत कल्याण के लिए हलाहल विषपान कर नीलकंठ भगवान कहलाए। हृदय में अमृत रूपी राम कंठ में विष धारण कर भोलेनाथ के शरीर में विश्राम का वास हो गया।


व्यासपीठासीन श्री शर्मा ने श्रोताओं को धनवान होने का सूत्र बताते हुए कहा कि माता लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी ,सरस्वती जी की पूजा अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि गणेश जी बुद्धि सिद्धि के दाता हैं ,लिहाजा गणेश जी की आराधना से मां लक्ष्मी का आगमन होता है लेकिन वे लंबे समय टिकती वही हैं जहाँ सरस्वती जी सन्मति का वास हो । जिस परिवार में घर में सन्मति हो वहाँ लक्ष्मी जी का लंबे समय का वास होता है। पंडित श्री शर्मा ने श्रोताओं को बताया कि सद्पुरुषों का कभी भी निरादर नहीं करना चाहिए चाहे वो ब्राम्हण हों ,संत हों या आमजन। क्योंकि इनके निरादर का बदला अगर वे न लें पाएं तो परमात्मा लेते हैं। दुर्वाशा जी के श्राप से इंद्र को स्वर्ग की सत्ता सुख खोना पड़ा ,स्वयं ईश्वर भी उनकी प्रत्यक्ष सहायता न कर सके।


विख्यात भागवत कथावक्ता सौरभ शर्मा ने कहा कि भगवान श्री हरि विष्णु के बावन अवतार कथा प्रसंग का सुंदर बखान करते हुए कहा कि जिन्होंने दो पग में ही 2 लोक नाप दिया ऐसे भगवान बावन की माया से दानवीर राजा बलि विचलित नहीं हुए । और अपनी अनन्य भक्ति समपर्ण का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्वयं को तीसरे पग धारण करने प्रस्तुत कर दिया और पाताल लोक के अधिकारी बने। सभी बारह दरवाजों में नारायण की द्वारपाल के रूप में दर्शन पाए। माता लक्ष्मी को बहन के रूप में पाकर जीवन धन्य बनाया। संगीतमय कथा के दौरान भगवान बावन की मनोहारी झांकी भी निकाली गई । जहां श्रोताओं ने भगवान वेशभूषाधारी भगवान बावन का दर्शन ,आशीष लिया।

