KORBA : अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना ने मुकुल -योगिता की जिंदगी में बिखेरी खुशियां , सहायक आयुक्त ने प्रशस्ति पत्र देकर किया प्रोत्साहित,जानें वित्तीय वर्ष में अब तक कितने हो चुके लाभान्वित …..

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा । प्रदेश में अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने और सामाजिक समरसता (अस्पृश्यता निवारण) के लिए शासन द्वारा “छत्तीसगढ़ अस्पृश्यता निवारणार्थ संचालित अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना” आकांक्षी जिला कोरबा में भी खुशियां बिखेर रही । योजना के अंतर्गत लाभान्वित दंपत्ति को आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित कर उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी है।

कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार मुकुल आनंद पिता राजेन्द्र आनंद ,अनुसूचित जाति निवासी इंदिरा नगर वार्ड क्रमांक 03 जिला-कोरबा का (छ.ग.) का योगिता पिता साधुराम जाति मरार (अन्य पिछड़ा वर्ग ) निवासी कांकेर के द्वारा छ.ग.शासन आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग मंत्रालय महानदी भवन अटल नगर नवा रायपुर अंतर्गत संचालित योजना अस्पृश्यता निवारणार्थ अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन पुरुस्कार योजना अंतर्गत विवाह संपन्न होने के उपरांत शासन द्वारा उक्त दंपत्ति को 2 लाख 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत किया गया है। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग में सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने नव दंपत्तियों को उक्त प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति पत्र देकर प्रोत्साहित किया। उज्ज्वल भविष्य एवं सफल जीवन की कामना की । शासन द्वारा प्रदान की गई 2.50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि में से 1 लाख दंपत्तियों के संयुक्त खाते में भुगतान किया गया तथा शेष राशि 1.50 लाख को उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 3 वर्ष की सावधि खाता में जमा कराया गया है। चालू वित्तीय वर्ष 2025 -26 में अब तक 10 नवदंपत्ति उक्त योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। जो योजना की सार्थकता को स्वतः सिद्ध कर रहा

👉योजना के मुख्य बिंदु

👉प्रोत्साहन राशि: योजना के अंतर्गत, पात्र विवाहित जोड़े को ₹2.50 लाख (ढाई लाख रुपये) तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

👉पात्रता (Eligibility):
दूल्हा या दुल्हन में से एक व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) समुदाय का होना चाहिए।

👉दूसरा जीवनसाथी गैर-अनुसूचित जाति (सामान्य या अन्य वर्ग) से होना अनिवार्य है।

👉यह दोनों का पहला विवाह होना चाहिए।

👉विवाह हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत कानूनी रूप से पंजीकृत होना चाहिए।

👉जोड़ा छत्तीसगढ़ का निवासी होना चाहिए।

👉आवेदन की समयसीमा: विवाह के 1 वर्ष के भीतर आवेदन करना आवश्यक है।

👉वितरण की प्रक्रिया: मिली जानकारी के अनुसार, प्रोत्साहन राशि का कुछ हिस्सा सीधे खाते में और शेष राशि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में दी जाती है।

👉आवश्यक दस्तावेज:
विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र (मैरिज सर्टिफिकेट )
जाति प्रमाण पत्र।

👉निवास प्रमाण पत्र (छत्तीसगढ़ का)।
आधार कार्ड (वर-वधू दोनों का)।
संयुक्त बैंक खाता विवरण।

👉आवेदन कैसे करें:
आवेदक जिले के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के जिला कार्यालय, कलेक्ट्रेट में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अलावा, राज्य के आदिवासी और अनुसूचित जाति विभाग की वेबसाइट (tribal.cg.gov.in) पर भी जानकारी उपलब्ध है।