👉 गरिमामयी और ऐतिहासिक आयोजन से ज्यादा आमंत्रण चर्चा में
कोरबा। जिला भारतीय जनता पार्टी कोरबा जिले में एक नया आयाम स्थापित करने जा रही है। एक नया सोपान तय करते हुए अत्याधुनिक, सुसज्जित और अनेक संसाधनों से युक्त जिला कार्यालय “अटल स्मृति भवन” की आधारशिला 2 फरवरी 2026 को रखी जानी है। यह कार्यक्रम जिला संगठन के लिए जितना महत्वपूर्ण है उतना ही चर्चा में है।
इस पूरे आयोजन को लेकर बांटा गया आमंत्रण कार्ड ऊर्जाधानी से राजधानी तक चर्चा बटोर रहा है।
पूर्व आबंटित कार्ड के साथ ही भूमिपूजन की पूर्व संध्या सोशल मीडिया में एक नया कार्ड वायरल हो रहा है जो पूर्व में वितरित और चर्चित कार्ड से भिन्न है।
नए कार्ड के तेवर बदले हैं-कलेवर बदले हैं और किरदार भी बदले हैं। हालांकि इस कार्ड में नया नाम राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पांडेय का जुड़ा है। सत्यसंवाद के द्वारा यह विषय प्रमुखता से सामने लाए जाने और संगठन में बात चलने का इतना असर जरूर हुआ कि जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी विशिष्ट अतिथि की श्रेणी से नीचे आकर विनीत में आ गए जो आयोजक क जिलाध्यक्ष होने के नाते उनका स्थान बनता है। हालांकि, उनके साथ जिला महामंत्री संजय शर्मा और अजय विश्वकर्मा का भी नाम जुड़ गया है।
👉 प्रथम नागरिक का नाम तक गायब

पूर्व के कार्ड में कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ.पवन सिंह विशिष्ट अतिथि की श्रेणी में शामिल थे लेकिन जो नया कार्ड पूर्व संध्या में वायरल हुआ है उसमें यह तीनों गायब हैं। नए कलेवर वाले कार्ड में प्रथम नागरिक तक नहीं हैं।
👉ननकी-ऋतु इस बार भी नहीं:-
आरएसएस और जनसंघी विचारधारा के साथ जिला भाजपा को आगे बढ़ाने में अपना जीवन समर्पित करने वाले ननकी राम कंवर और कोरबा में निवासरत प्रदेश मंत्री ऋतु चौरसिया इस बार भी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही हैं। माना जा रहा था कि प्रदेश संगठन में बात उठने के बाद ननकीराम कंवर और ऋतु चौरसिया को कार्ड में शामिल किया जा सकता है किंतु वायरल कार्ड में भी उनका नाम नहीं है।
👉 कार्ड की राजनीति
अब वायरल दूसरे कार्ड की सच्चाई की पुष्टि हम नहीं करते किन्तु इस बात को लेकर शहर सहित भाजपा के ही खेमों में सरगर्मी है कि आखिर अलग-अलग कार्ड की राजनीति पर्दे के पीछे से कौन खेल रहा है? पूर्व जिला अध्यक्षों के भी नाम छापवाने से परहेज क्यों किया गया, जबकि सरगुजा जिले में पूर्व जिला अध्यक्षों को तवज्जो दी गई है। भाजपा के पदाधिकारी की मानें तो कार्ड राजधानी से फाईनल हुआ है और उसे खास सिपहसालार के खास लोगों ने अंतिम रूप दिया है और उनकी इच्छा के अनुसार ही इस बार नाम शामिल किए गए हैं। खैर वजह और परिस्थितियां जो भी हों,पार्टी का अपना मामला है लेकिन इतना तो तय है कि संगठन में चाह कर भी बहुत कुछ मन मुताबिक नहीं हो पा रहा और आपसी मनभेद-मतभेद बने रहने के साथ ही साथ यह यह ताज काँटों भरा है।
