CG : शराब घोटाला केस के आरोप में सेंट्रल जेल में निरुद्ध पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को 378 दिन बाद मिली जमानत , कांग्रेस ने बताई सत्य की जीत ,आतिशबाजी कर बांटी मिठाईयां ….

रायपुर । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री एवं वर्तमान सुकमा विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। करीब 378 दिनों तक रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध रहे कवासी लखमा को राहत मिलने पर कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है, जबकि भाजपा की ओर से इस पर संयमित प्रतिक्रिया सामने आई है।

कवासी लखमा को जमानत मिलने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कवर्धा में बड़ा बयान देते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने साजिश के तहत एक वरिष्ठ आदिवासी नेता को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजा था। उन्होंने कहा कि “आज न्यायपालिका पर भरोसा और मजबूत हुआ है। सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं होता।” दीपक बैज ने कवासी लखमा को जमानत मिलने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके जेल से बाहर आने से कांग्रेस संगठन को मजबूती मिलेगी और पार्टी पूरी ताकत के साथ भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष करेगी।

जमानत की खबर मिलते ही सुकमा जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की, एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं और इसे सत्य की जीत बताया। कई जगहों पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर अपनी खुशी जाहिर की।

वहीं, कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि कवासी लखमा को भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर षड्यंत्रपूर्वक कथित शराब घोटाले में फंसाया था। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ आदिवासी नेता को राजनीतिक विद्वेष के चलते महीनों तक जेल में रखा गया, लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई।

दूसरी ओर, भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रायपुर में भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कहा कि यदि किसी ने कानूनी लड़ाई लड़ी है और कोर्ट से जमानत मिली है तो यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने यह भी कहा कि जमानत किन शर्तों पर मिली है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। सुनील सोनी ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “अब लखमा अपराध के रास्ते को भूल जाएंगे। शॉर्टकट से पैसा कमाने के तरीके अंततः तकलीफदेह होते हैं, यह सीख उन्हें मिल गई होगी।”

गौरतलब है कि 28 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कवासी लखमा के ठिकानों पर दबिश दी थी। इसके बाद ईडी ने कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश कवासी को पूछताछ के लिए बुलाया। 2 जनवरी को ईडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर नगद पीओसी के उपयोग और डिजिटल डिवाइस बरामद होने की जानकारी साझा की थी। ईडी के अनुसार, शराब घोटाले से जुड़े पैसों का उपयोग सुकमा और कोंटा के कांग्रेस कार्यालय निर्माण में किए जाने के साक्ष्य सामने आए थे। इसके अलावा, कवासी लखमा के बेटे हरीश कवासी के घर निर्माण में भी कथित तौर पर इन्हीं पैसों के उपयोग की बात कही गई थी।

कवासी लखमा 3 जनवरी को पहली बार और 9 जनवरी को दूसरी बार अपने बेटे के साथ ईडी दफ्तर पहुंचे थे। लंबी पूछताछ के बाद 15 जनवरी को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था।अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जहां कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ जीत बता रही है, वहीं भाजपा इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया मान रही है।