0 रविशंकर शुक्ल नगर स्थित कपिलेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य रुद्र महायज्ञ , शिव महापुराण कथा में उमड़ रही आस्था
हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा। शिवनाम में ही इतना सामर्थ्य है कि आपके सारे मनोरथ को पूरा कर सकता है इसके लिए किसी टोटके के सहारे की जरूरत नहीं । अतएव कोई आपको नदी किनारे 20 दिन ये करो वो करो ,पीपल के पेड़ में जल डालने ,लाल कपड़ा में तिल बांधकर रखने ,शंकर जी के सामने दिया रखने आदि टोटकों का सहारा लेने का उपाय बताए उससे दूर रहकर सच्चे विश्वास ,वैदिक परंपरा का आश्रय लेकर ही अपने जीवन को परिवर्तित कर सकते हैं। उक्त बातें अयोध्या से पधारे आचार्य
पं. हनुमान दास जी महाराज ने
पं. रविशंकर शुक्ल नगर, कोरबा स्थित श्री कपिलेश्वर नाथ मंदिर प्रांगण में श्री कपिलेश्वर नाथ महिला मंडल सेवा समिति एवं समस्त रविशंकर नगरवासियों द्वारा जनकल्याणार्थ आयोजित रुद्र महायज्ञ एवं शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस शिव पुराण महात्म्य के दौरान कही ।


विख्यात शिव महापुराण कथा वक्ता पंडित श्री हनुमान दास जी महाराज ने श्रोताओं को शिव महापुराण कथा के महात्म्य का बखान करते हुए कहा कि अमरत्व प्रदान करने वाली शिवपुराण कथा के श्रवण मात्र से लोकनिंदित कार्य करने वाले ,व्यभिचारी ब्राम्हण देवराज व चंचुला मृत्योपरांत नरकगामी की जगह शिवलोकगामी बने। स्वयं शिवगण इन्हें लेने आए ,और वे भगवान शंकर की कृपा से अनन्य शिवगणों में शामिल हुए।
पंडित श्री हनुमान दास जी महाराज ने श्रोताओं को बताया कि शिव पुराण साक्षात शिव का स्वरूप है।शिव महापुराण अमरता प्रदान करने वाली कथा है इसे श्रवण करने वाले को अनन्यानन्य भटकने की आवश्यकता ही नहीं । आज अनेकों पुण्य स्वरूप शिव इच्छा ,शिव कृपा से हम सबको शिव महापुराण की पावन दिव्य कथा का रसास्वादन करने का पावन अवसर मिल रहा। शिव महापुराण कथा वक्ता श्री हनुमान दास जी महाराज ने श्रोताओं को बताया कि धन की 3 गति होती है। जिसमें से दो गति दान एवं भोग मानव के अधिकार क्षेत्र में हैं। इसका हर मानव को सदुपयोग करना चाहिए। परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के बाद दान के विभिन्न प्रकल्पों दान , मंदिर में चढ़ावा ,गरीबों को दान ,गौ सेवा समेत अन्य परमार्थ कार्यों में धन के दूसरे हिस्से का उपयोग कर उसकी सार्थकता सिद्ध करनी चाहिए ,अन्यथा ईश्वर तीसरे गति विनाश से उस धन को हमसे विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से अल्पसमयावधि में हमसे छीन सकते हैं ।


पंडित हनुमान दास जी महाराज ने श्रोताओं को दरिद्रता की उचित परिभाषा से रूबरू कराते हुए बताया कि धन की कमी वाला इंसान सिर्फ निर्धन हो सकता है ,जिसके पास सबकुछ होने के बाद भी न खाता है न खिलाता है,दान -पुण्य कर्म में नहीं लगाता वही सही मायने में दरिद्र है।
पंडित हनुमान दास जी महाराज ने श्रोताओं को बताया कि हर व्यक्ति के जीवन में 3 महत्वपूर्ण नैतिक जिम्मेदारी होती है। पहला समाज ,दूसरा धर्म की रक्षा ,तीसरा राष्ट्र की रक्षा। हम जिस समाज में रहते हैं हमें ईर्ष्या त्याग परस्पर प्रेम से रहना चाहिए। ईर्ष्या किसी के भी प्रति नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्या की आग में मनुष्य न सुखी रहता है न समृद्धि को प्राप्त करता है न सिद्धि की प्राप्ति होती है। हम जिस सुंदर समाज में रहते हैं उसमें ऐसा सत्संग ,संकीर्तन धर्मार्थ आयोजन होना चाहिए। राष्ट्र की रक्षा भी हम सबका नैतिक कर्तव्य है। अन्यथा जिस देश भू -भाग में हम रहते हैं उसमें किसी आतिताईयों के अतिक्रमण से हम पराधीन हो सकते हैं।जिसके जीवन में ज्ञान ,भक्ति ,वैराग्य ,एवं सदाचार नहीं उसका जीवन पशुता को प्राप्त कर जाता है।वो मानव होते हुए भी पशु तुल्य है।
आचार्य श्री पंडित हनुमान दास जी महाराज ने श्रोताओं को बताया कि कृष्ण ,शिव ,राम सबमें शिव तत्व समाया है। किसी में कोई अंतर,भिन्नता नहीं करनी चाहिए । अतः इनमें से जो भी हमारे ईष्ट हैं उनमें हमें अपने ईष्ट को ढूंढना चाहिए । हमें किसी में भी संशय नहीं करना चाहिए। सबके परमत्त्व एक हैं ,सिर्फ कल्पभेद में ही रूपों में भिन्नता है। जिसका पुराण होता है उसका तत्व श्रेष्ठ होता है। आयोजित शिव महापुराण में कथा श्रवण करने श्रोताओं की उपस्थिति एवं उत्साह दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन 4 फरवरी को बंधन सौर मोझ का विमोचन होगा। चौथे दिन 5 फरवरी को दक्ष की तपस्या,देवी शिव का वरदान ,शिव पार्वती विवाह , 6 फरवरी को पांचवे दिन हिरण्यकश्यप की तपस्या ,ब्रम्हा से वरदान की कथा प्रसंग संपन्न होगी। 7 फरवरी को छठवें दिन देवी शिव के क्रियायोग का वर्णन ,8 फरवरी को सातवें दिवस देवी पार्वती का काली रूप धारण करना ,शुम्भ निशुम्भ का वध , 9 फरवरी को आठवें दिवस देवी पार्वती के साथ वृषभ का आरुद्र के पश्चात 10 फरवरी को सहस्त्रधारा के साथ कथा का समापन होगा।
वहीं यज्ञाचार्य काशी वाले आचार्य नागेंद्र पांडेय जी महाराज के सानिध्य में नित्य प्रातः 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक यज्ञ आरंभ वेदी मण्डप पूजन एवं यज्ञाहुति संपन्न हो रहा। 10 फरवरी को पूर्णाहुति वशोधारा ,सहस्त्रधारा ,भंडारा उपरांत उक्त पुनीत आयोजन का समापन होगा।
