KORBA : ” वापस करो हमारी जमीन ,बंद करो पेड़ों की कटाई ” ,जरहाजेल के भू -विस्थापितों ने भरी हुंकार ,SECL पर शर्तों के उल्लंघन का लगाया आरोप ,4 दशक पुराने अवार्ड का हवाला देकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन ….

कोरबा। कुसमुंडा क्षेत्र के ग्राम जरहाजेल में एसईसीएल (SECL) और जिला प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में भू-विस्थापितों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अधिग्रहित जमीन वापस करने और वर्तमान में की जा रही पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि एसईसीएल 1983 में पारित अवार्ड की शर्तों का खुला उल्लंघन कर रही है।

👉 1983 के आदेश में थी जमीन वापसी की शर्त

भू-विस्थापित दामोदर श्याम, इंद्र प्रकाश और घासीराम कैवर्त ने बताया कि वर्ष 1983 में तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर कोरबा द्वारा पारित आदेश (राजस्व प्रकरण क्र. 2/अ-67/82-83) में स्पष्ट उल्लेख था कि कोयला उत्खनन के बाद 20 वर्षों के भीतर और अन्य निर्माण कार्यों के लिए ली गई जमीन 60 वर्षों के बाद मूल भू-स्वामियों को वापस करनी होगी। ग्रामीणों का कहना है कि उत्खनन की अवधि बीत चुकी है, ऐसे में शर्तों के अनुसार जमीन अब किसानों को मिलनी चाहिए।

👉दहशत के साये में पेड़ों की कटाई

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और एसईसीएल बुलडोजर के सहारे दहशत का माहौल बनाकर अन्य गांवों के पुनर्वास के लिए जबरन पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि अवार्ड की शर्तों में अन्य गांवों को बसाने का कोई प्रावधान नहीं था, फिर भी नियम विरुद्ध तरीके से यहां बसाहट देने का प्रयास किया जा रहा है।

👉रोजगार और बसावट के लिए भटक रहे किसान

विस्थापितों का दर्द है कि जमीन जाने के दशकों बाद भी रोजगार और मुआवजे के कई प्रकरण लंबित हैं। प्रबंधन ‘अवार्ड’ की प्रतियां उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाकर युवाओं को नौकरी देने से मना कर रहा है। किसानों ने सवाल उठाया कि “जब एसईसीएल के पास अवार्ड की जानकारी ही नहीं है, तो वे किसानों की जमीन का उपयोग कैसे कर रहे हैं?”