कोरबा-बांकीमोंगरा। जमीन का सीमांकन के बाद प्रतिवेदन में कूटरचना करने के मामले में जहां राजस्व विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली कटघरे में है वहीं न्यायालयीन आदेश पर एसपी ने सख्ती दिखाई है। भू-अधीक्षक से लेकर 3 आरआई और भृत्य ने जिसके लिए यह सारा कुचक्र रचा, उसे ही आरोपी नहीं बनाया जा सका है।
8 साल के लंबे अंतराल में उसे आखिर क्यों अभयदान मिला हुआ है जबकि शिकायत से लेकर जांच और तमाम दस्तावेजों में वह प्रमुख तौर पर शामिल होता रहा है। आश्चर्यजनक व चर्चा का विषय है कि पुलिस ने न जाने किस आधार पर उसे इस पूरे कूटरचना से बाहर रखा है, जबकि उसी को लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों ने अपना दामन दागदार कर लिया है। पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहा है कि आखिर मुख्य कर्ताधर्ता दिनेश अग्रवाल आरोपी की सूची में शामिल होने से क्यों और कैसे बच रहा है?
👉यह है वास्तविक मामला,इसी में बचाया जा रहा दिनेश को

रामकरण अग्रवाल व संतोष अग्रवाल ने आयुक्त बिलासपुर को वर्ष 2018 के जनदर्शन में अपने स्वामित्व एवं आधिपत्य की भूमि खसरा नं. 113/2 रकबा 0.291 हेक्टेयर भूमि ग्राम मोंगरा, प. ह. नं. 15, बांकी मोगरा, तहसील कटघोरा, जिला कोरबा छ.ग. की भूमि को जिला स्तरीय गठित सीमांकन टीम के माध्यम से सीमांकन कराये जाने हेतु आवेदन दिया गया था। उक्त आवेदन के पश्वात आयुक्त के द्वारा कलेक्टर को सीमांकन किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। कलेक्टर कार्यालय कोरबा से सीमांकन आदेश के पश्चात भू अभिलेख शाखा कोरबा के द्वारा 03.03.2016 को सीमांकन किये जाने हेतु नोटिस जारी किया गया। उक्त सीमांकन दल के द्वारा 03.03.2016 को सीमांकन की कार्यवाही मौके पर जाकर की गयी। मौके पर उपस्थित गवाहों के समक्ष सीमांकन दल के द्वारा सीमांकन की कार्यवाही की गयी तथा पंचनामा भी तैयार किया गया। सीमांकन के अनुसार रामकरण व सन्तोष अग्रवाल की भूमि पर अन्य लोगों के अलावा दिनेश अग्रवाल पिता गोविन्द अग्रवाल, निवासी बसंल गारमेंट, बांकी मोंगरा के द्वारा भूमि पर अतिक्रमण किये जाने का पंचनामा तैयार किया गया और उक्त पंचनामा में रामकरण, संतोष तथा शेष गवाहों के हस्ताक्षर हैं। उक्त पंचनामा के पश्चात सीमांकन प्रतिवेदन को तैयार होने के पश्चात प्रमाणित नकल कलेक्टर कार्यालय नकल शाखा से प्राप्त करने के लिए सीमांकन दल के द्वारा कहा गया। रामकरण के पुत्र संतोष कुमार अग्रवाल के द्वारा उक्त सीमांकन प्रतिवेदन तथा पंचनामा एवं नजरी नक्शा की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त की गयी। जिसमें यह पाया गया कि सीमांकन दल के द्वारा दिनेश अग्रवाल को लाभ पहुंचाने के लिए उसके द्वारा किए गए अतिक्रमण को 000 कूटरचना कर दिया गया था। जानकारी होते ही इसकी शिकायत कलेक्टर को जनदर्शन में 25.04.2016 को की गयी। शिकायत के आधार पर कलेक्टर के द्वारा पुनः सीमांकन कर उक्त प्रतिवेदन पर किये गये कूटरचना की जाँच किये जाने के लिए जाँच दल का गठन किया गया।
👉 यहाँ की गई दस्तावेजी छेड़छाड़
जॉच दल के द्वारा जाँच किये जाने के पश्चात दिनांक 30.09.2016 को प्रतिवेदन दिया गया और उक्त प्रतिवेदन के अनुसार जाँच दल के द्वारा जो जाँच प्रतिवेदन का विषय दिया गया, उस विषय में ही भू अभिलेख अधीक्षक जे. पी. सिंह के द्वारा जिला स्तरीय गठित सीमांकन दल के पंचनामा में छेडखानी (कूटरचना) करने पर उचित कार्यवाही किये जाने बाबत प्रतिवेदन दिया गया है और उक्त प्रतिवेदन में जॉच दल के द्वारा सम्पूर्ण जाँच किये जाने से स्पष्ट है कि सीमांकन दल के प्रभारी जे. पी. सिंह तत्कालीन अधीक्षक भू अभिलेख कोरबा द्वारा मौके पर किये गये सीमांकन पंचनामा में ऊपरी लेखन कर उसे शून्य किया गया है तथा शून्य (0) करने के पश्चात पंचनामा में पुनः सभी व्यक्तियों के हस्ताक्षर लेने थे जो कि नहीं लिया गया। इस प्रकार से जाँच दल के अनुसार दिनेश अग्रवाल के कब्जे को पंचनामा पश्चात शून्य किये जाने के कारणों को उल्लेख नहीं किया गया, जो संदेहास्पद है और यह भी स्पष्ट किया गया है कि पीड़ितों की भूमि पर दिनेश अग्रवाल के द्वारा अतिक्रमण किया गया है और उक्त जॉच प्रतिवेदन की पुष्टि कलेक्टर के द्वारा अपने आदेश की गयी है।उपरोक्त समस्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि सीमांकन दल के द्वारा सीमांकन किये जाने के पश्चात व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए धोखाधड़ी कर दस्तावेजों में छेडखानी एवं कूटरचना की गयी है। इसके आधार पर उपरोक्त व्यक्तियों के विरूद्ध जाँच कर अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही किये जाने के निवेदन पर मामला आगे बढ़ा है। 8 साल पुराने इस मामले में पहले अधीक्षक भू अभिलेख जेपी सिंह और हाल ही में तीन राजस्व निरीक्षकों को एक साथ सलाखों के पीछे भेजा गया है।
