कोरबा। मुंबई से आकर छत्तीसगढ़ में चांदी के जेवरातों की सप्लाई करने वाला एक व्यापारी पहले चोरी का शिकार हुआ, फिर पुलिस ने नहीं सुनी और मामला जीएसटी में ले जाकर फंसा दिया। अब केंद्रीय जीएसटी के अधिकारियों की मनमानी से वह परेशान हो गया है। उस व्यापारी के चोरी गए लगभग 10 किलो चांदी की रिपोर्ट लिखने से कोरबा पुलिस इनकार कर रही है तो वहीं चोरी होने से बच गई चांदी को जप्त कर उसके कागजात जीएसटी ऑफिस को भेज दिए गए। अब जीएसटी ऑफिस के अधिकारी-कर्मचारी व्यापारी को परेशान करने लगे तो व्यापारियों और छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के पदाधिकारी ने जीएसटी ऑफिस जाकर अधिकारी से सवाल-जवाब किया।

जानकारी के मुताबिक मुंबई का एक व्यापारी संजय कुमार बाहेती लगभग 23 किलो चांदी के जेवरात लेकर अंबिकापुर से एक बस में सवार होकर 13 मई को रायपुर जा रहा था। कोरबा जिले के बांगो थाना अंतर्गत एक होटल में जब बस रात को लगभग 1 बजे रुकी तो संजय ने अपने पास रखे 23 किलो चांदी से भरे तीन बैग सीट पर छोड़ा और नीचे लघुशंका के लिए उतर गया। वापस लौटा तो उसके दो बैग जिसमें लगभग 10 किलो चांदी के जेवरात रखे थे, सीट से गायब मिले।
मुंबई के व्यापारी संजय ने बताया की बस के ड्राइवर ने उसे गुमराह किया और किसी से चर्चा करने नहीं दिया। संजय ने जब बांगो पुलिस को इसकी जानकारी दी तो उससे कहा गया कि आपके पास कोई माल नहीं था और था भी तो उसकी चोरी आपने स्वयं कर ली है। इसी के साथ 12 किलो 377 ग्राम चांदी के जेवरात जो चोरी होने से बच गए,उसे पुलिस ने अपने पास रख लिया।
संजय ने बताया कि अब वह जीएसटी ऑफिस के चक्कर काट रहा है। सारे कागजात जमा कर देने के बाद भी जीएसटी ऑफिस क्लीयरेंस नहीं दे रहा है जबकि यह चांदी उसी का है।
उसने कोरबा के सराफा व्यापारियों से इस विषय में संपर्क किया।छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के कोरबा जिला अध्यक्ष संतोष अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश सोनी, सुभाष अग्रवाल,दिनेश सोनी समेत कई अन्य पदाधिकारी और व्यापारी जीएसटी ऑफिस पहुंचे। यहां मौजूद अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने पर व्यापारियों ने खूब खरी-खोटी सुनाई।
जीएसटी अधिकारियों ने इस मामले में तमाम अवरोध का रोना रोते हुए अपना पिंड छुड़ाने की कोशिश की लेकिन व्यापारी यही कहते अड़े रहे कि सारे कागजात उपलब्ध कराने के बाद भी यदि व्यापारी परेशान है, तो इसका मतलब स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में व्यापारियों को निर्भय कारोबार करने की छूट नहीं है। यदि मुंबई के व्यापारी के साथ न्याय नहीं हुआ तो कोरबा के व्यापारी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। पदाधिकारियो ने अफसोस जाहिर किया कि कोरबा पुलिस ने चोरी की शिकायत नहीं सुनी व एफआईआर तक दर्ज नहीं किया।
