कोरबा । खनिज -प्रशासन कटघोरा क्षेत्र में रेत माफियाओं के आगे नतमस्तक नजर आ रहा है। कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए कटघोरा क्षेत्र में रेत माफिया रात के अंधेरे में बेखौफ गौण खनिज की लूट में लिप्त हैं।
मामला कटघोरा थाना क्षेत्र के जुराली व नया पुल बाईपास घाट का है, जहां अहिरन नदी के पुल के ठीक नीचे से हर रात धड़ल्ले से अवैध रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब कुछ माइनिंग विभाग के नाके के सामने से हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
👉रात 10 बजते ही सक्रिय होता है माफिया

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जैसे ही रात के 10 बजते हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसरना शुरू होता है, शहर के रेत माफिया पूरी तरह सक्रिय हो जाते हैं। अंधेरे का फायदा उठाकर रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर अहिरन नदी के पुल के नीचे पहुंच जाते हैं। बिना किसी कानूनी डर या प्रशासनिक खौफ के, रात भर नदी का सीना चीरकर रेत निकाली जाती है और ट्रैक्टरों के माध्यम से इसका अवैध परिवहन किया जाता है।
👉नाका प्रभारी को ‘सेट’ करने का आरोप
इस पूरे अवैध कारोबार में माइनिंग विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि रेत माफियाओं ने माइनिंग विभाग के नाका प्रभारी को मोटी रकम देकर ‘सेट’ कर लिया है। यही वजह है कि रात भर चलने वाले इस अवैध खेल पर माइनिंग विभाग पूरी तरह मौन धारण किए हुए है।
👉बड़ा सवाल:
ट्रैक्टरों का काफिला रात के अंधेरे में शहर के बीच चौराहे से होकर गुजरता है, लेकिन गश्त करने वाली पुलिस और माइनिंग विभाग के आला अधिकारियों को ये गाड़ियां नजर नहीं आतीं। यह अंधापन किसी मिलीभगत की ओर साफ इशारा करता है।
👉रेलवे और बड़े निर्माण कार्यों में खपाई जा रही रेत
रात भर में निकाली गई इस अवैध रेत को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे निजी व सरकारी निर्माण कार्यों में खपाया जा रहा है। इसके अलावा क्षेत्र में चल रहे रेलवे के बड़े प्रोजेक्ट्स और अन्य निजी साइटों पर भी इस अवैध रेत की धड़ल्ले से सप्लाई की जा रही है।
👉पुल के अस्तित्व पर मंडराया खतरा

नदी के पुल के ठीक नीचे से लगातार हो रहे रेत के अवैध उत्खनन के कारण अब पुल के पिलर्स (खंभों) को भी खतरा पैदा हो सकता है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद माइनिंग विभाग के उच्च अधिकारी और जिला प्रशासन इस अवैध कारोबार पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर रेत माफिया इसी तरह रात के अंधेरे में चांदी काटते रहेंगे।
