CG : साय सरकार में नहीं थम रहा लोकसेवकों का भ्रष्टाचार , 15 हजार रिश्वत लेते हेड कांस्टेबल गिरफ्तार ,24 घण्टे के भीतर 3 शासकीय सेवकों के गिरफ्तारी से सिस्टम उठे सवाल ….

रायपुर । सूबे की सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी के लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते 24 घंटों के भीतर एंटी करप्शन ब्यूरो ने तीन सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। गुरुवार को बिलासपुर में एक पटवारी और बिजली विभाग के एक बाबू के खिलाफ कार्रवाई के बाद

आज शुक्रवार को बेमेतरा जिले में एक प्रधान आरक्षक 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एसीबी के ट्रैप में फंस गया।

जानकारी के मुताबिक बेमेतरा जिले के थान खम्हरिया थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक अजय लहरे पर एक ग्रामीण से कार्रवाई नहीं करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता खैरझिटीकला निवासी दुर्गेश पटेल ने एसीबी को बताया कि गांव में पेड़ कटाई को लेकर हुए विवाद के बाद प्रधान आरक्षक धारा 151 के तहत कार्रवाई करने की धमकी देकर पहले 20 हजार रुपये की मांग कर रहा था। बाद में कथित तौर पर 15 हजार रुपये में बात तय हुई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोप सही मिला, इसके बाद ट्रैप की योजना बनाई गई।

शुक्रवार को शिकायतकर्ता ने केमिकल लगे 15 हजार रुपये आरोपी को दिए। जैसे ही प्रधान आरक्षक ने रकम अपने हाथों में ली, ठीक वैसे ही पहले से तैनात एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद थान खम्हरिया थाना परिसर में कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। एसीबी अधिकारियों ने मौके पर दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इस मामले में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका तो नहीं है।

आपको बता दे एक दिन पहले ही बिलासपुर में एसीबी ने दो अलग-अलग मामलों में एक पटवारी और बिजली विभाग के एक बाबू को भी रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। लगातार दूसरे दिन हुई इस कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। हालांकि इन लगातार ट्रैप कार्रवाइयों को एसीबी की सक्रियता का संकेत भी माना जा रहा है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि आम लोगों को अपने वैध काम कराने के लिए आखिर रिश्वत देने की नौबत क्यों आ रही है ? जानकारों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश के लिए केवल ट्रैप कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विभागीय जवाबदेही, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।