उत्तरप्रदेश । जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते सर्पदंश की घटनाओं में अचानक बढ़ोत्तरी हो गई है। बुधवार की रात जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 20 लोगों को सांपों ने डस लिया।
सभी को आनन-फानन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से कुछ गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया गया। चिकित्सकों के अनुसार बारिश के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर रिहायशी इलाकों और खेतों में आ रहे हैं, जिसकी वजह से सर्पदंश के मामले बढ़ गए हैं।
जिला अस्पताल में रातभर सर्पदंश के पीड़ितों को लाने का सिलसिला चलता रहा। इनमें गिजरौली निवासी देवा को खेत से लौटते समय पैर में सांप ने डस लिया। थाना हाथरस गेट क्षेत्र के नयाबांस निवासी पिंकी देवी पत्नी रमेश चंद्र को रात में सोते समय सांप ने काट लिया।
हाथरस जंक्शन कोतवाली क्षेत्र के गांव हाजीपुर निवासी जमुना देवी पत्नी दिनेश कुमार भी सर्पदंश की शिकार हुईं।


इसके अलावा रम नगला निवासी सौदान पुत्र रामदयाल, थाना मुरसान क्षेत्र के कोटा निवासी रानी पुत्री असलम, थाना हाथरस गेट के लहरा निवासी सुशीला पुत्री वीरपाल, सासनी के जिरौली निवासी हिमानी पुत्री रामचरन, हसायन निवासी विष्णु पुत्र रामहेत, सादाबाद के सिखरा निवासी रविंद्र पुत्र हजारीलाल, मुरसान के मगटई निवासी सनी पुत्र भगवान सिंह, चंदपा के चंद्रगढ़ी निवासी विमलेश देवी पत्नी भगवान सिंह, हाथरस जंक्शन के रुद्रपुर निवासी महेश और चंदपा के ही बिसाना निवासी अमित, हुकुम सिंह निवासी नगला घना, ओम प्रकाश निवासी बरामई, देवकी नंदन निवासी सुरंगपुरा और महेश निवासी रुद्रपुर भी सर्पदंश से घायल हुए हैं।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सभी को एंटी-वेनम देकर उपचार शुरू किया गया। कुछ पीड़ितों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में रात में विशेष सावधानी बरतें, घर में कीटनाशक का छिड़काव करें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और अंधेरे में बाहर निकलते समय टार्च साथ रखें। सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें।
👉सर्पदंश के मामलों में अब तक चार की मृत्यु
जिले में बारिश के बाद सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। पिछले पांच दिन में सर्पदंश से तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई मरीज जिला अस्पताल में उपचाराधीन हैं। लगातार हो रही बारिश और जलभराव के कारण सांप आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत है। जिला अस्पताल में सर्पदंश के रोजाना छह से आठ मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने लोगों से रात में बिना जूते-चप्पल के बाहर न निकलने, झाड़ियों में हाथ न डालने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सीएचसी-पीएचसी में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
👉सर्पदंश के बाद क्या करें, क्या न करें?
👉मरीज को आश्वस्त करें और घबराने न दें। घबराने से दिल की धड़कन तेज होती है और जहर तेजी से फैलता है।
👉काटे गए हिस्से को जितना हो सके कम हिलाएं। हाथ या पैर में काटा है तो उसे लकड़ी या गत्ते के सहारे सीधा रखें।
👉सांप ने हाथ में डसा है तो हाथ को ऐसा लटकाएं जैसे वह टूट गया हो। पीड़ित को खड़ा न होने दें और न चलने दें।
👉सर्पदंश के मामले में पीड़ित को सोने नहीं देना चाहिए।
👉किसी भी तरह की घरेलू दवा या नुस्खा आजमाने से बचें।
👉सांप काटने के बाद समाज में फैली भ्रांतियों व अंधविश्वास से बचें।

