रायपुर । खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ अब क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान और वैज्ञानिक विकास के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र नागपुर के बीच शनिवार को एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, सतत और मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में उठाया गया अहम कदम है। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा के बेहतर दोहन के साथ-साथ औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
सीएमडीसी और जेएनएआरडीडीसी के बीच हुए इस समझौते के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और क्रिटिकल मिनरल्स के विकास पर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इससे प्रदेश में उपलब्ध खनिज संसाधनों का योजनाबद्ध और तकनीक आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। एमओयू एक्सचेंज कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ ने कहा कि अनुसंधान आधारित खनिज विकास और संस्थागत सहयोग भविष्य में खनन क्षेत्र को नई दिशा देगा। वहीं, भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने खनिज साधन विभाग और सीएमडीसी के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए इसे राज्य के खनन क्षेत्र के लिए सकारात्मक पहल बताया।

👉सीएमडीसी ने रखी भविष्य की कार्ययोजना
कार्यक्रम में सीएमडीसी के महाप्रबंधक यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा में अपार संभावनाएं हैं और वैज्ञानिक व जिम्मेदार खनन के जरिए इन संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
वहीं, रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन और कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता को मजबूती मिली है।
👉रेड मड से क्रिटिकल मिनरल्स निकालने पर शोध
जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम और वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की रिकवरी पर शोध कर रहा है। उनके मुताबिक, ऐसे अनुसंधान भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
👉औद्योगिक विकास और रोजगार पर रहेगा फोकस
राज्य सरकार का कहना है कि यह साझेदारी केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग, मूल्य संवर्धन और सतत खनन को भी बढ़ावा देगी। इससे प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
👉क्या हैं क्रिटिकल मिनरल्स ?
क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। इन खनिजों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ का यह कदम भविष्य की खनिज अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
