एजेंसी । देश में खाने-पीने की चीजों में मिलावट को लेकर एक बड़ा खुलासा खुद सरकार ने संसद में किया है. लोकसभा में 24 जुलाई 2026 को पूछे गए एक सवाल के जवाब में हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट प्रतापराव जाधव ने बताया कि पिछले पांच फाइनेंशियल ईयर्स में देशभर में जांचे गए फूड सैंपलों में से 1.85 लाख से ज्यादा सैंपल अनसेफ या मिलावटी पाए गए हैं.

यह सवाल सांसद राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे ने पूछा था, जिसमें महाराष्ट्र सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में दूध, कुकिंग ऑयल, मसालों, मिठाइयों, मंदिर के प्रसाद और ड्रिंक्स में मिलावट की बढ़ती घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा गया था.
सरकार के डेटा के मुताबिक, इस दौरान सबसे ज्यादा मिलावटी सैंपल उत्तर प्रदेश में पकड़े गए, जबकि राजस्थान और तमिलनाडु भी टॉप-3 राज्यों में शामिल रहे. इसी दौरान 11 हजार से ज्यादा फूड लाइसेंस रद्द किए गए और साढ़े चार हजार से अधिक लाइसेंस सस्पेंड किए गए. FSSAI के मुताबिक, फूड बिजनेस ऑपरेटर्स में से करीब 98 परसेंट स्टेट या यूनियन टेरिटरी के फूड सेफ्टी अथॉरिटीज के अंडर आते हैं, इसलिए एक्शन लेने की मेन रिस्पॉसिबिलिटी भी राज्यों की ही है. सरकार ने बताया कि रैपिड टेस्टिंग किट्स, मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब्स और पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन के जरिए मिलावट पर लगाम कसने की कोशिश की जा रही है.
👉पांच साल में सबसे ज्यादा फूड सैंपल फेल होने वाले टॉप-3 राज्य
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, बीते पांच फाइनेंशियल ईयर्स में उत्तर प्रदेश लगातार सबसे ज्यादा नॉन-कन्फॉर्मिंग यानी तय मानकों पर खरे न उतरने वाले सैंपलों के मामले में टॉप पर रहा है. फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (प्रोविजनल) में उत्तर प्रदेश में 20,427, राजस्थान में 4,594 और तमिलनाडु में 3,984 सैंपल नॉन-कन्फॉर्मिंग पाए गए. इससे पहले 2024-25 में उत्तर प्रदेश में 16,500, राजस्थान में 3,788 और तमिलनाडु में 2,240 सैंपल फेल हुए, जबकि 2023-24 में उत्तर प्रदेश में 16,183, राजस्थान में 3,493 और तमिलनाडु में 2,237 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे. ईयर 2022-23 में उत्तर प्रदेश 18,108 सैंपलों के साथ टॉप पर रहा, उसके बाद तमिलनाडु में 7,924 और राजस्थान में 3,965 सैंपल फेल हुए. वहीं 2021-22 में उत्तर प्रदेश में 13,153, तमिलनाडु में 3,778 और मध्य प्रदेश में 2,900 सैंपल नॉन-कन्फॉर्मिंग पाए गए थे.
