कोरबा। बारिश के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने के साथ वन्यजीवों के अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर रिहायशी और खेतों की ओर आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसा ही एक मामला शनिवार सुबह कोरबा जिले के तरदा गांव में सामने आया, जहां एक ग्रामीण के घर के पास करीब 4.5 फीट लंबा मगरमच्छ पहुंच गया। मगरमच्छ को घर के पास देखकर ग्रामीणों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, कोरबा शहर से करीब 16 किलोमीटर दूर तरदा गांव में शनिवार सुबह लगभग 6 बजे थिरत राम मांझी अपने घर के आसपास मौजूद थे। इसी दौरान उनकी नजर घर के पास खेत में मौजूद एक बड़े जीव पर पड़ी। सुबह की कम रोशनी में पहली नजर में उन्हें लगा कि शायद कोई अजगर है। लेकिन जब उन्होंने कुछ दूरी से ध्यान से देखा तो पता चला कि वह अजगर नहीं बल्कि करीब 4.5 फीट लंबा मगरमच्छ था।
मगरमच्छ को घर के बिल्कुल पास देखकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। ग्रामीणों ने बिना उसके करीब गए तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा।
👉हसदेव नदी के बढ़े जलस्तर से खेतों तक पहुंचने की संभावना

इन दिनों क्षेत्र में लगातार बारिश के चलते हसदेव नदी उफान पर है और नदी तथा आसपास के जलस्रोतों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। ऐसे में वन विभाग और रेस्क्यू टीम के अनुसार यह संभावना जताई जा रही है कि मगरमच्छ नदी में बढ़े जलस्तर के कारण अपने सामान्य क्षेत्र से निकलकर आसपास के खेतों या ग्रामीण क्षेत्र में पहुंच गया होगा।
मगरमच्छ आमतौर पर पानी के आसपास रहने वाला वन्यजीव है। भारी बारिश के दौरान नदी का पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने पर कई बार जलीय वन्यजीव भी अपने सामान्य स्थान से बाहर निकल जाते हैं। तरदा गांव में मिला मगरमच्छ भी संभवतः इसी तरह पानी के बहाव के साथ खेतों और आबादी के नजदीक पहुंचा होगा। हालांकि, मगरमच्छ के यहां पहुंचने का वास्तविक कारण वन विभाग की निगरानी और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
👉वन विभाग और RCRS ने संभाला मोर्चा
मगरमच्छ की सूचना मिलने के बाद कोरबा वनमंडल अधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देशानुसार एवं उप वनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही RCRS (Reptile Care and Rescuer Society) की रेस्क्यू टीम के अध्यक्ष अविनाश यादव को मौके पर बुलाया गया।
रेस्क्यू अभियान में करतला रेंजर अक्ष ऋषि, कपिल कवि, परिसर रक्षक सैंडल, दीपक कुजूर, महोरा एवं के.पी. सिदार सहित RCRS अध्यक्ष अविनाश यादव और रेस्क्यू टीम के सदस्य मानस मौजूद रहे।
टीम के मौके पर पहुंचने के बाद सबसे पहले आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया गया, ताकि मगरमच्छ के कारण किसी ग्रामीण को खतरा न हो और रेस्क्यू के दौरान भीड़ या किसी प्रकार की परेशानी न आए।
👉सावधानी से किया गया मगरमच्छ का रेस्क्यू
वन विभाग और RCRS की टीम ने स्थिति का आकलन करने के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की कार्रवाई शुरू की। रेस्क्यू टीम ने पूरी सावधानी और आवश्यक सुरक्षा उपायों के साथ मगरमच्छ को नियंत्रित किया और उसे सुरक्षित पकड़ लिया।
रेस्क्यू के दौरान ग्रामीणों को मगरमच्छ से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। टीम ने यह भी सुनिश्चित किया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मगरमच्छ को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे और ग्रामीणों की सुरक्षा भी बनी रहे।
काफी सावधानी के बाद मगरमच्छ का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद वन विभाग द्वारा आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी की गई।
👉सुरक्षित स्थान पर भेजा गया मगरमच्छ
पंचनामा एवं आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से कोटमीसोनार भेज दिया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान किसी भी ग्रामीण या रेस्क्यू टीम के सदस्य को किसी प्रकार की चोट नहीं आई।
मगरमच्छ के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने वन विभाग और RCRS टीम की तत्परता की सराहना की, जिन्होंने सूचना मिलने के बाद समय पर मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
👉बारिश के मौसम में वन्यजीवों से रहें सावधान
बारिश के मौसम में नदी, नाले, तालाब और अन्य जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ने के कारण वन्यजीवों के मूवमेंट में बदलाव देखने को मिलता है। ऐसे समय में सांप, मगरमच्छ सहित अन्य वन्यजीव कई बार खेतों, सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास दिखाई दे सकते हैं।
वन विभाग और RCRS की ओर से ग्रामीणों से अपील की गई है कि यदि किसी भी प्रकार का वन्यजीव दिखाई दे तो घबराकर उसके करीब न जाएं, उसे छेड़ने या पकड़ने की कोशिश न करें और भीड़ इकट्ठा न करें। वन्यजीव को सुरक्षित दूरी से देखते हुए तत्काल वन विभाग या अधिकृत रेस्क्यू टीम को इसकी सूचना दें।
तरदा गांव में हुई इस घटना में भी ग्रामीणों की जागरूकता और समय पर सूचना देने के कारण रेस्क्यू टीम को कार्रवाई करने का मौका मिला और करीब 4.5 फीट लंबे मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया।
