Tata Steel की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत, ₹1780 करोड़ का टैक्स और जुर्माना रद्द …

नई दिल्ली। देश की दिग्गज स्टील निर्माता कंपनी टाटा स्टील (Tata Steel News) को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए करोड़ों रुपये की जीएसटी (GST) डिमांड और भारी-भरकम जुर्माने को पूरी तरह खत्म यानी रद कर दिया है।

टाटा स्टील ने जीएसटी डिमांड और जुर्माने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

आपको बता दें कि हाल में टाटा स्टील ने अपनी ‘जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (JFSPL) को 100 रुपये मे बेचा था। टाटा की यह कंपनी जमशेदपुर फुटबॉल क्लब चलाती थी, जो अब चर्चिल ब्रदर्स फुटबॉल क्लब की हो गई है। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) के नियमों के अनुसार इस ट्रांसफर में क्लब का इंडियन सुपर लीग (ISL) स्पोर्टिंग लाइसेंस और 12 खिलाड़ियों व 2 कोचों का ट्रांसफर भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विभाग केवल “तथ्यों को छिपाने” (suppression of facts) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 (CGST एक्ट) की धारा 74 के तहत समय-सीमा बढ़ाने (extended limitation period) का प्रावधान लागू नहीं कर सकता। इसके लिए आरोप का समर्थन करने वाले बुनियादी तथ्यों को बताना जरूरी है।

👉क्या था पूरा मामला?

यह विवाद टाटा स्टील को 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के फाइनेंशियल ईयर के लिए जारी किए गए ‘शो कॉज नोटिस’ (कारण बताओ नोटिस) से शुरू हुआ। यह नोटिस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में कथित अंतर और टैक्स के कम भुगतान से जुड़ा था। नोटिस CGST एक्ट की धारा 74 के तहत जारी किया गया था। यह धारा टैक्स की वसूली की इजाजत देती है जब टैक्स का भुगतान न होने, कम भुगतान होने या ITC का गलत तरीके से लाभ उठाने या इस्तेमाल करने का कारण कथित तौर पर धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत जानकारी देना या तथ्यों को छिपाना हो।

जमशेदपुर स्थित सीजीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त कार्यालय ने टाटा स्टील को एक ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था। विभाग का आरोप था कि कंपनी ने नियमों के खिलाफ जाकर ITC का लाभ उठाया है।

👉TATA Steel ने दायर की थी विशेष अनुमति याचिका

टाटा स्टील ने इस डिमांड को पहले झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने कंपनी को अपीलीय प्राधिकरण (Appellate Authority) के पास जाने की सलाह दी थी। इसके बाद टाटा स्टील ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।

दिसंबर 2025 में, संबंधित अथॉरिटी ने कंपनी की दलीलों को दरकिनार करते हुए ₹890.52 करोड़ का टैक्स और उतनी ही राशि यानी ₹890.52 करोड़ का जुर्माना भरने का आदेश दिया था। इसके अलावा इस राशि पर ब्याज भी लागू था।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए कंपनी की अपील को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने विभाग द्वारा जारी नोटिस और आदेश को रद्द (Set Aside) कर दिया है। इसके साथ ही ₹890,52,10,202 का टैक्स डिमांड और इतनी ही राशि का जुर्माना (यानी लगभग 1780 करोड़ रुपये से ज्यादा) अब खत्म हो गया है।