नेपाल विनाशकारी बाढ़ नदियों के रास्तों में इंसानी दखल के भयानक नतीजे’, ब्रह्मा चेलानी ने बताया क्यों लंबे समय से दी जा रही चेतावनी

नई दिल्ली: नेपाल में बाढ़ के साथ आई भीषण तबाही ने सबको हैरान कर दिया है। अचानक आई इस आपदा में बड़ी-बड़ी इमारतें इस तरह बह गईं जैसे ताश के पत्ते तेज हवा में गिर जाते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक 600 करीब लोगों की मौत की जानकारी सामने आ रही है।

वहीं, 2 हजार के करीब लोग लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता जा रहा है मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका भी बढ़ती जा रही है।

👉बढ़ सकते हैं प्राकृतिक खतरे

मशहूर जिओ पॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने इस हादसे को लेकर एक पोस्ट शेयर की है। उन्होंने लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के तिब्बती हिस्से में तबाही मचाने और उसके बाद नेपाल के निचले इलाकों में भारी जान-माल का नुकसान करने वाली बाढ़ की प्राकृतिक आपदा इस बात का एक जबरदस्त उदाहरण है कि भू-आकृति विज्ञान (Geomorphological Research) से जुड़ी रिसर्च में लंबे समय से क्या बताया गया है। पहाड़ी इलाकों और नदियों के रास्तों में इंसानी दखल से प्राकृतिक खतरों का रूप बदल सकता है और वे और भी भयानक हो सकते हैं।

👉निचले इलाकों में बढ़ गया असर

ब्रह्मा चेलानी ने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों और जियोलॉजिकल मैपिंग से पता चलता है कि नेपाल की तरफ मौजूद एक ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों का एक एवलांच (बर्फ का तूफान) टूटकर अलग हो गया। यह एवलांच अंतरराष्ट्रीय सीमा के किनारे से 1.2 किलोमीटर दूर तिब्बत की तरफ ऊपरी बेसिन में गिरा और फिर सीमा पार बहने वाली नदी प्रणाली में जा मिला। तिब्बत सीमा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बने बुनियादी ढांचे ने भौतिक, संरचनात्मक और परिचालन संबंधी कमजोरियों के कारण निचले इलाकों पर पड़ने वाले असर को और बढ़ा दिया।

👉क्यों इतनी तेज थी पानी की रफ्तार?

उन्होंने आगे कहा कि कृत्रिम संरचनाओं ने बाढ़ के पानी को बाढ़ के मैदान में स्वाभाविक रूप से फैलने से रोका। इसके बजाय, उन्होंने कीचड़, मिट्टी और चट्टानों के मिश्रण को एक संकरी घाटी से होकर गुजारा, जिससे नेपाल के कोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में प्रवेश करते समय इसकी गति और तेज हो गई। गाद और निर्माण कार्यों के मलबे से भरा यह अत्यधिक सघन मिश्रण साफ बाढ़ के पानी की तुलना में कहीं अधिक गतिज ऊर्जा वाला था। इसने एक शक्तिशाली प्रहारक की तरह काम करते हुए निचले इलाकों में पुलों, सड़कों और जलविद्युत सुविधाओं को नष्ट कर दिया।

👉चीन को भारी नुकसान, आंकड़े गायब

ब्रह्मा चेलानी ने एक ब्रिटिश लेखक और दार्शनिक एल्डस हक्सले के हवाले से बताया कि उन्होंने कहा था, अगर आप चाहते हैं कि प्रकृति आपके साथ अच्छा व्यवहार करे तो आपको भी प्रकृति के साथ अच्छा व्यवहार करना होगा। अगर आप प्रकृति को नष्ट करना शुरू करेंगे, तो प्रकृति आपको नष्ट कर देगी। इस आपदा ने चीन के अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसमें ग्यिरोंग पोर्ट भी शामिल है, जो नेपाल के साथ द्विपक्षीय व्यापार के लिए उसका मुख्य जमीनी रास्ता है। चीनी अधिकारियों ने आपदा से जुड़ी जानकारी पर रोक लगा रखी है, इसलिए तिब्बत की तरफ मरने वालों की संख्या का पता नहीं चल पाया है।