नेपाल विनाशकारी बाढ़ की तबाही से सुरंग में फंसे हैं 898 लोग, भारत के टनल एक्सपर्ट कैसे करेंगे सबसे मुश्किल रेस्क्यू? 6 इंच के पाइप से पहुंच रही आक्सीजन …

नेपाल। नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अलग-अलग 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे करीब 898 कर्मचारी अब भी लापता या फंसे हुए बताए जा रहे हैं, जबकि 361 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में बचाव अभियान सबसे चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। यहां सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक हवा पहुंचाने के लिए 6 इंच का छेद कर पाइप डाला गया है। अब इसी रास्ते को बड़ा कर बचाव दल के अंदर पहुंचने की तैयारी की जा रही है।

👉6 इंच के पाइप से सुरंग में पहुंचाई जा रही हवा

त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों को बचाने के लिए मशीनों से लगातार मिट्टी, गाद और मलबा हटाया जा रहा है। बचावकर्मियों ने सुरंग तक पहुंचने के लिए 6 इंच का छेद बनाया है, जिसके जरिए पाइप डालकर अंदर हवा पहुंचाई जा रही है। इससे सुरंग में फंसे लोगों के जिंदा होने की उम्मीद बनी हुई है और रेस्क्यू टीम को आगे की रणनीति बनाने में मदद मिल रही है।

👉अब छोटे छेद को मैनहोल में बदलने की तैयारी

रेस्क्यू ऑपरेशन का अगला चरण सबसे अहम माना जा रहा है। बचावकर्मी 6 इंच के छेद को धीरे-धीरे बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी कर रहे हैं। मैनहोल तैयार होने के बाद विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्क्यू कर्मी सुरंग के अंदर प्रवेश कर सकेंगे। इसके बाद अंदर फंसे कर्मचारियों की सही स्थिति का पता लगाने और उन्हें बाहर निकालने का अभियान तेज होगा। हालांकि, मिट्टी और गाद लगातार चुनौती बनी हुई है।

👉11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे हैं कर्मचारी

नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित अलग-अलग 11 जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 898 कर्मचारी लापता या फंसे हुए हैं। इनमें कुछ भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। अब तक 361 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। अपर त्रिशुली-1 समेत कई परियोजनाओं में सुरंगों के प्रवेश द्वार मलबे से बंद हो गए हैं। ऐसे में हर परियोजना के लिए अलग-अलग तकनीकी रणनीति बनाकर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

👉भारत ने भेजी सुरंग विशेषज्ञों की विशेष टीम

भारत भी नेपाल के इस बड़े बचाव अभियान में मदद कर रहा है। भारत ने राहत उड़ान के जरिए चिकित्सा और सुरंग बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यीय विशेष तकनीकी टीम नेपाल भेजी है। टीम ने प्रभावित हाइड्रोपावर सुरंगों का निरीक्षण कर फंसे लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी की संभावनाओं का आकलन किया। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारतीय विशेषज्ञ नेपाल की रेस्क्यू एजेंसियों के साथ मिलकर तकनीकी सहायता दे रहे हैं।

👉हेलीकॉप्टर, सेना और विदेशी मदद से चलेगा बड़ा ऑपरेशन

नेपाल सेना ने बचाव अभियान के लिए 15 हेलीकॉप्टर और कम से कम 84 प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया है। इसके अलावा सैकड़ों बचावकर्मी अलग-अलग प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं। नेपाल ने जटिल सुरंग रेस्क्यू, जीवित लोगों का पता लगाने की तकनीक, फोरेंसिक पहचान और DNA परीक्षण के लिए पड़ोसी देशों से भी मदद मांगी है। एक चीनी कंपनी के भी बचाव अभियान में शामिल होने की संभावना है, जिससे ऑपरेशन को अतिरिक्त तकनीकी सहायता मिल सकती है।