मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए है। नदियां और नाले उफान पर हैं और कई इलाकों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है।

चित्रकूट में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद रामघाट समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
मध्य प्रदेश में भारी बारिश से सतना के चित्रकूट में बाढ़ आ गई है। NDRF-SDRF की टीमों ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं और 700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
👉SDRF और NDRF की टीम सक्रिय
जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि चित्रकूट में पानी का स्तर अब कम होने लगा है। अगर आज रात बारिश नहीं हुई, तो हालात पूरी तरह काबू में रहेंगे। हम इलाके पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं।
बाढ़ का जलस्तर, जो पहले 139 मीटर दर्ज किया गया था, आज दोपहर करीब 2:00 बजे 146 मीटर तक पहुंच गया था, जिसके बाद यह घटने लगा। ज्यादातर मामलों में, जहां घरों में पानी घुस गया था, वहां लोगों ने अपनी छतों पर शरण ली। SDRF और NDRF की दो स्थानीय टीमें तुरंत जमीन पर सक्रिय हो गईं।
👉हवाई बचाव अभियान
हालांकि, सड़कों के संपर्क में भारी रुकावट के कारण राहत टीमों को मौके पर पहुंचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हमने राज्य सरकार से हवाई मदद की मांग की, जिसने केंद्र सरकार के साथ मिलकर हवाई बचाव अभियान का इंतजाम किया। हवाई मदद का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया।
👉साफ-सफाई और सुरक्षा को प्राथमिकता
चित्रकूट के DM ने ट्वीट किया, बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य लगातार चल रहे हैं। जिला प्रशासन और NDRF की टीमें इन कामों में सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं, जबकि चित्रकूट नगरपालिका प्रभावित क्षेत्रों में साफ-सफाई का काम कर रही है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरी सेवाओं की बहाली, साफ-सफाई और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
👉सीएम मोहन यादव ने बुलाई आपातकालीन बैठक
रीवा में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चित्रकूट में भारी बारिश और मंदाकिनी नदी में बाढ़ से पैदा हुए हालात को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक की।
बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “हालात की जानकारी मिलने पर मैं बालाघाट से दिल्ली लौटा और आज रीवा पहुंचा। मुझे बताया गया कि भारी बारिश की वजह से सिमरावल और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे सतना और चित्रकूट में बाढ़ के गंभीर हालात बन गए हैं। हमारी बचाव टीमें तुरंत तैनात कर दी गईं और जिला प्रशासन ने बहुत कुशलता से अपना काम किया।”
उन्होंने आगे कहा, अब तक लगभग 700 लोगों को बचाया जा चुका है। दो लोगों को हेलीकॉप्टर से और बाकी लोगों को बचाव नावों के ज़रिए निकाला गया। चित्रकूट में शेल्टर कैंप बनाए गए हैं। 6,000 से ज्यादा खाने के पैकेट बांटे गए हैं। अच्छी बात यह है कि बाढ़ के कारण अभी तक किसी की जान नहीं गई है, हालांकि राहत और बचाव कार्य रात भर जारी रहेंगे। मैं प्रार्थना करता हूं कि सब सुरक्षित रहे, और हमारी सरकार नागरिकों को हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है। मैं कल खुद चित्रकूट जाकर जमीनी हालात का जायजा लूंगा।
नेपाल सेना ने बचाव
