नेपाल । नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ ने दोनों देशों में भारी तबाही मचाई है, लेकिन मौतों के आधिकारिक आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आने के बाद चीन की ओर से जारी जानकारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

नेपाल में जहां सैकड़ों लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, वहीं तिब्बत में चीनी प्रशासन ने अपेक्षाकृत बेहद कम मौतों की जानकारी दी है। सूचना तक सीमित पहुंच और स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर प्रतिबंधों के कारण तिब्बत में वास्तविक नुकसान की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा ने कई गांवों, सड़कों और बुनियादी ढांचों को प्रभावित किया है। नेपाल में पत्रकारों, स्थानीय प्रशासन, राहत एजेंसियों और बचावकर्मियों से लगातार जानकारी सामने आ रही है। दूसरी ओर, तिब्बत के प्रभावित इलाकों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित सूचनाएं सीमित होने के कारण वहां की वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
👉नेपाल में 669 मौतें, तिब्बत में 7 लोगों की मौत का दावा

नेपाल पुलिस के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में आई बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 669 तक पहुंच गई है। इस आपदा में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
वहीं, सीमा के दूसरी ओर तिब्बत में चीनी प्रशासन की ओर से केवल सात लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। दोनों क्षेत्रों में हुई तबाही के स्तर और मौतों के आंकड़ों में बड़े अंतर ने कई सवाल खड़े किए हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत की ग्यिरोंग सीमा के आसपास कई आबादी वाले गांव मौजूद हैं। ऐसे क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन से हुए वास्तविक नुकसान का स्वतंत्र आकलन करना मुश्किल बना हुआ है। इसी वजह से चीनी प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
👉नेपाल में जमीन से सामने आ रही हैं तस्वीरें

नेपाल में बाढ़ के बाद स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के प्रतिनिधि प्रभावित इलाकों तक पहुंचे हैं। वहां से क्षतिग्रस्त मकानों, बह चुकी सड़कों और राहत शिविरों की तस्वीरें तथा वीडियो लगातार सामने आए हैं।
बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों ने भी आपदा के दौरान हुए नुकसान और कठिन परिस्थितियों की जानकारी दी है। प्रशासन की ओर से मृतकों और लापता लोगों से संबंधित आंकड़ों को भी समय-समय पर अपडेट किया जा रहा है।
इसके विपरीत तिब्बत के प्रभावित क्षेत्रों से स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टिंग काफी सीमित बताई जा रही है। वहां से सामने आने वाली अधिकांश जानकारी आधिकारिक एजेंसियों और सरकारी मीडिया के माध्यम से उपलब्ध हो रही है।
👉चीनी मीडिया की कवरेज पर भी उठे सवाल
आलोचकों का कहना है कि चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्टिंग में राहत और बचाव कार्यों पर अधिक ध्यान दिया गया, जबकि प्रभावित लोगों और वास्तविक मानवीय नुकसान से जुड़ी जानकारी सीमित रही।
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि प्रभावित क्षेत्रों तक स्वतंत्र पत्रकारों की पहुंच आसान नहीं है। ऐसे में बाढ़ से प्रभावित गांवों की वास्तविक स्थिति और वहां हुई मौतों की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है।
आपदा के दौरान सटीक जानकारी का अभाव राहत कार्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति के आकलन को भी प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि तिब्बत में मौतों और नुकसान के आंकड़ों को लेकर अधिक पारदर्शिता की मांग उठ रही है।
👉तिब्बत में स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर लंबे समय से पाबंदियां
तिब्बत को चीन के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया जाता है। यहां विदेशी पत्रकारों और स्वतंत्र मीडिया संस्थानों की गतिविधियों पर लंबे समय से कड़े नियंत्रण की बात सामने आती रही है।
मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूहों का कहना है कि तिब्बत में स्वतंत्र रिपोर्टिंग के अवसर सीमित हैं और कई मामलों में पत्रकारों को सरकारी नियमों के तहत ही प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच मिलती है।
ऐसी स्थिति में नेपाल और तिब्बत में हुई इस भीषण प्राकृतिक आपदा की तुलना करना आसान नहीं है। नेपाल में जहां जमीन से लगातार सूचनाएं सामने आ रही हैं, वहीं तिब्बत में वास्तविक नुकसान की पूरी तस्वीर अब भी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल चीन की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों को ही तिब्बत में मौतों की संख्या का आधार माना जा रहा है। हालांकि, स्वतंत्र और व्यापक जानकारी उपलब्ध न होने के कारण इस आपदा में वास्तविक नुकसान और मौतों की संख्या को लेकर सवाल और चर्चाएं लगातार बनी हुई है।
