कोरबा। मानसून में लगातार हो रही बारिश ने एसईसीएल की कोयला उत्पादन रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। अब बारिश थमने के बाद कंपनी के सामने सिर्फ उत्पादन की भरपाई करना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि खदान विस्तार से जुड़े भूविस्थापितों के लंबित मामलों और संभावित आंदोलनों से निपटना भी अहम होगा। कोरबा की तीनों मेगा माइंस गेवरा, दीपका और कुसमुंडा में उत्पादन प्रभावित होने से एसईसीएल को चालू वित्त वर्ष में उत्पादन के मामले में एमसीएल से पिछडऩा पड़ा है।

तीन दिन पहले एसईसीएल करीब 2 लाख 65 हजार टन कोयले का उत्पादन कर सकी थी, जबकि कंपनी का दैनिक लक्ष्य 3 लाख टन से अधिक है। अब तक एसईसीएल का कुल उत्पादन लगभग 64 मिलियन टन रहा है, वहीं एमसीएल का उत्पादन 66 मिलियन टन के पार पहुंच गया है। इस अंतर के साथ कोल इंडिया की सर्वाधिक उत्पादन करने वाली कंपनी एमसीएल ने एक बार फिर बढ़त बना ली है।मानसून बाद एसईसीएल के लिए सबसे बड़ी चुनौती खदानों के विस्तार से जुड़े भूविस्थापन के मामलों की हो सकती है। गेवरा, कुसमुंडा और दीपका जैसी खदानों के विस्तार के लिए जमीन की आवश्यकता है। लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर प्रभावित ग्रामीणों में असंतोष है और बारिश के बाद विस्थापन प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। कंपनी ने खदान प्रभावितों के पुनर्वास के लिए चिन्हित बसाहट स्थलों की योजना तैयार की है। कुसमुंडा से प्रभावित खोडरी, पाली और जटराज, गेवरा से प्रभावित नराईबोध तथा दीपका से प्रभावित हरदीबाजार के लिए बसाहट स्थलों का चिन्हांकन किया जा चुका है। अब इन मामलों में आगे बढऩे के साथ स्थानीय स्तर पर विरोध और आंदोलन की स्थिति कंपनी के लिए चुनौती बन सकती है।ऐसे में मानसून के बाद का दौर एसईसीएल के लिए ‘रिकवरी बनाम भूविस्थापन’ की दोहरी चुनौती लेकर आएगा। कंपनी की उत्पादन रणनीति कितनी सफल रहती है और खदान विस्तार के लिए प्रभावित ग्रामीणों के लंबित मुद्दों का समाधान किस तरह किया जाता है, इस पर एसईसीएल की आगे की उत्पादन क्षमता काफी हद तक निर्भर करेगी।
👉तीनों मेगा माइंस पर बारिश का असर
कोरबा जिले में कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश होती रही। इसका सीधा असर खुली खदानों में कोयला खनन और परिवहन पर पड़ा। एसईसीएल की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा मेगा माइंस में भी उत्पादन प्रभावित हुआ। कंपनी के कुल उत्पादन में इन तीनों खदानों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए यहां उत्पादन में आई गिरावट का असर पूरे एसईसीएल के आंकड़ों पर दिखाई दे रहा है।
मानसून के दौरान खुली खदानों में बारिश के कारण खनन गतिविधियां प्रभावित होना सामान्य है। कंपनी बारिश के बाद बेहतर माइन प्लान और उत्पादन की रफ्तार बढ़ाकर इस घाटे की भरपाई करने की तैयारी करती है। ऐसे में आने वाले महीनों में एसईसीएल की उत्पादन गति महत्वपूर्ण होगी। एसईसीएल और एमसीएल के उत्पादन आंकड़ों के बीच बढ़ता अंतर कंपनी पर दबाव बढ़ाने वाला है। मानसून के कारण उत्पादन में आई कमी की भरपाई के लिए अब एसईसीएल को शेष वित्त वर्ष में अतिरिक्त उत्पादन की रणनीति बनानी होगी। इसके लिए खदानों में उत्पादन बढ़ाने के साथ कोयला परिवहन और डिस्पैच की गति भी बनाए रखना जरूरी होगा।
