KORBA : सरपंच के अधिकारों का पति ने किया अतिक्रमण , SECL की वर्दी में L&R कार्यालय में सरपंच के नाम पर साइन ,उठे सवाल !

कोरबा-कुसमुंडा। परियोजना प्रभावित ग्राम पंचायत खोडरी की सरपंच उमा कंवर के अधिकारों के कथित इस्तेमाल का मामला अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि उनके पति अजय कंवर, जो SECL कुसमुंडा में कार्यरत हैं, ने सरपंच की ओर से उनके नाम पर दस्तावेज में हस्ताक्षर किए।

मामले का एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें अजय कंवर SECL की वर्दी में L&R कार्यालय के भीतर एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में ग्राम पंचायत के उपसरपंच सुरेश पटेल भी मौजूद दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि दस्तावेज किनार कंपनी में रोजगार/नौकरी से जुड़ी प्रक्रिया का है।

👉सरपंच की जगह पति ने किस अधिकार से किए हस्ताक्षर?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दस्तावेज पर सरपंच उमा कंवर के नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं तो अजय कंवर को यह अधिकार किसने दिया था? क्या उनके पास सरपंच की ओर से हस्ताक्षर करने का कोई लिखित प्राधिकरण था? इसकी जांच जरूरी है। साथ ही मूल दस्तावेज, हस्ताक्षर, वीडियो की तारीख और समय तथा संबंधित कार्यालय के रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उस समय सरपंच कहां थीं और दस्तावेज किस उद्देश्य से तैयार किया गया था।

👉SECL की वर्दी में कार्यालय पहुंचने पर भी सवाल टीवीऔर वीडियो डिवाइस

अजय कंवर के SECL कर्मचारी होने के कारण उनकी ड्यूटी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि वीडियो की तारीख और समय उनकी ड्यूटी अवधि से मेल खाता है तो SECL प्रबंधन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे उस समय किस ड्यूटी पर थे और L&R कार्यालय में उनकी मौजूदगी किस अनुमति के तहत थी।

👉उपसरपंच की भूमिका भी जांच के दायरे में

वीडियो में उपसरपंच सुरेश पटेल की मौजूदगी ने सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन सिर्फ मौके पर मौजूद होने से उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। दस्तावेज और उनके बयान के आधार पर उनकी भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए।

👉BNS और पंचायत कानून के तहत जांच की जरूरत

यदि जांच में यह साबित होता है कि अजय कंवर ने बिना अधिकार सरपंच के नाम से हस्ताक्षर किए और उसका इस्तेमाल वास्तविक दस्तावेज के रूप में किया गया, तो दस्तावेज की प्रकृति के आधार पर BNS की जालसाजी संबंधी धाराओं में कार्रवाई की संभावना की जांच हो सकती है। वहीं पंचायत पद के अधिकार के दुरुपयोग या कदाचार के तथ्य सामने आने पर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत कार्रवाई की applicability भी देखी जा सकती है।
फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पंचायत प्रशासन और SECL प्रबंधन से मूल दस्तावेज, वीडियो, कार्यालयीन रिकॉर्ड और ड्यूटी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।