KORBA : कांग्रेस ने झीरम नरंसहार पर NIA कोर्ट के फैसले को बताया आधा -अधूरा न्याय,कहा -बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की नहीं हुई जांच …

कोरबा। 23 मई 2013 को हुए झीरम घाटी नरसंहार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 32 लोगों की हत्या के मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए इसे “आधा-अधूरा न्याय” बताया है। पार्टी का कहना है कि अदालत ने उन्हीं तथ्यों के आधार पर फैसला दिया, जो एनआईए ने उसके समक्ष प्रस्तुत किए थे।

जयसिंह ने आरोप लगाया कि एनआईए की जांच शुरू से दिशाहीन रही और घटना के पीछे के कथित राजनीतिक षड्यंत्र के पहलुओं की जांच नहीं की गई। उनका कहना है कि जिन 10 आरोपियों को एनआईए ने गिरफ्तार कर दोषी पाया, वे छोटे स्तर के नक्सली थे। इतनी बड़ी घटना बिना बड़े नक्सली नेताओं के संभव नहीं थी। कांग्रेस ने दावा किया कि एनआईए की शुरुआती एफआईआर में नक्सली नेता गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) और रमन्ना समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे। 21 मार्च 2014 को गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी हुआ था।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगस्त 2014 तक सूची में शामिल इन नामों को सितंबर 2014 में प्रस्तुत चार्जशीट से क्यों हटा दिया गया। पार्टी ने यह भी सवाल किया कि झीरम हमले में वांछित और इनामी घोषित रहे नक्सलियों, जिनमें बाद में कई ने आत्मसमर्पण किया, से एनआईए ने पूछताछ क्यों नहीं की। कांग्रेस ने चैतू उर्फ श्याम दादा, रूपेश उर्फ मोल्ला राजिरेड्डी, निर्मला उर्फ सुमित्रा, भूपति उर्फ सोनू दादा और केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता समेत सरेंडर करने वाले नक्सलियों से पूछताछ और अभियोजन को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी और नक्सल ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ क्यों नहीं की, इसका भी जवाब सामने नहीं आया। पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह झीरम का सच सामने नहीं आने देना चाहती। साथ ही कांग्रेस ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस की एसआईटी की जांच को लेकर भी लंबे समय तक अड़चनें पैदा की गईं।