CG : एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS ) बतौली में बुनियादी सुविधाओं की कमी,जिम्मेदार अधिकारियों ने फेरी आंखे तो कलेक्टर से मिलने छात्राओं ने भूखे प्यासे पैदल नाप दिया 20 किलोमीटर का फासला, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश ,कांग्रेस ने निगरानी व्यवस्था पर उठाए सवाल

0 पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा विधायक रील बनाने में व्यस्त,सरकारी हॉस्टलों की कमियों को छुपाने के लिए सरकार ने मीडिया कवरेज पर रोक लगाने का फरमान जारी किया …

अंबिकापुर। बस्तर,कोरबा के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों(EMRS ) में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही का मुद्दा अब सरगुजा तक पहुंच गया है।
सरगुजा जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शिवपुर बतौली में बिजली,पानी,पढ़ाई की गुणवत्ता सहित अन्य समस्याओं को कलेक्टर के समक्ष रखने छात्राओं को 20 किमी पैदल चलना पड़ा। सहायक आयुक्त समेत जिला प्रशासन की अदूरदर्शिता ,छात्रों तक नहीं पहुंचने की वजह से छात्राओं को अपनी बात रखने कलेक्टोरेट जाने 20 किलोमीटर का लंबा फासला भूखे प्यासे पैदल तय करना पड़ा। इस बदइंतजामी की वायरल तस्वीरों ने निगरानी व्यवस्था और जवाबदेहिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले मे कलेक्टर ने जांच समिति गठित कर 2 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए हैं।

आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सहित अन्य अधिकारी इस पर पर्दा डालने के बजाए कलेक्टर को सूचित करते और कलेक्टर छात्राओं के कलेक्ट्रेट आने का इंतजार करने के बजाए स्वंय उन तक पहुंच समस्या सुनते तो ऐसी स्थिति नहीं बनती। गैर जिम्मेदार अधिकारियों के चलते भूखी प्यासी छात्राएं पैदल चलती रही, छात्राएं रास्ते में कलेक्टर के अलावा किसी और से बात करने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। सहायक आयुक्त सहित अन्य अधिकारी भी छात्राओं को मनाने पैदल हांफते चलते रहे मगर छात्राएं नहीं मानीं।

20 किमी पैदल चलने के बाद छात्राएं जब रघुनाथपुर पहुंची तब कहीं जाकर बस से अंबिकापुर आने राजी हुई।सहायक आयुक्त की पहल पर 2 स्कूल बस पहुंची और छात्राओं को बस से अंबिकापुर लाया गया। उन्हें कलेक्ट्रेट ले जाने के बजाए पोलिटेक्निक कॉलेज ले जाकर पुनः समझाने का प्रयास किया,जब छात्राएं नहीं मानीं तब रैली की शक्ल में अधिकारी उन्हें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। अधिकारियों की अदूरदर्शिता अनदेखी और मनमानी के कारण एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राएं बार बार पैदल चल कलेक्टर को गुहार लगाने मजबूर हो रही हैं।

👉कलेक्टर को बंद हाल में बताई समस्या,जांच समिति गठित 2 दिन के भीतर प्रतिवेदन देने के आदेश

छात्राओं ने कलेक्टर अजीत वसंत को अन्य अधिकारियों के बंद हाल में समस्या बताई,कलेक्टर ने हर समस्या दूर करने आश्वासन देते हुए शिकायतों की जांच के लिए टीम गठित किया है, टीम को 2 दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने निर्देश दिया है। छात्राओं के इस कदम ने आवासीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

👉एक महीने से बिजली गुल

छात्राओं की ओर से यह भी बताया गया कि विद्यालय में करीब एक महीने से बिजली की समस्या बनी हुई है। बिजली जैसी मूलभूत सुविधा लंबे समय से प्रभावित होने की बात सामने आने के बाद मामले को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

👉पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा विधायक रील बनाने में व्यस्त,सरकारी हॉस्टलों की कमियों को छुपाने के लिए सरकार ने मीडिया कवरेज पर रोक लगाने का फरमान जारी किया

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि यदि एकलव्य विद्यालय की बच्चियों को अपनी समस्याएं बताने के लिए पैदल मार्च करना पड़ रहा है तो यह चिंता का विषय है। भगत ने क्षेत्रीय विधायक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बच्चे पैदल मार्च कर रहे हैं और क्षेत्र के विधायक रील बनाने में व्यस्त हैं। उन्होंने सरकारी हॉस्टलों में मीडिया कवरेज पर रोक लगाए जाने के फैसले को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। अमरजीत भगत के अनुसार सरकारी हॉस्टलों की कमियों को छुपाने के लिए सरकार ने मीडिया कवरेज पर रोक लगाने का फरमान जारी किया है। उन्होंने कहा कि यदि हॉस्टलों में व्यवस्थाएं बेहतर हैं तो फिर मीडिया कवरेज से रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।पूर्व मंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से बिजली की समस्या होने की बात का उल्लेख करते हुए सरकार और प्रशासन से छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने तथा मूलभूत सुविधाएं तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की।

👉कांग्रेस भी करेगी जांच समिति गठित

कांग्रेस जिला अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि शिवपुर, बतौली एकलव्य विद्यालय की आदिवासी छात्राओं का स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर पैदल यात्रा करना गम्भीर मामला है। 1 महीने से विद्यालय में बिजली नहीं है यह गंभीर प्रशासनिक चूक है। छात्राओं की मौजूदगी में में मैंने कलेक्टर सरगुजा से चर्चा की है। कलेक्टर के द्वारा जांच की बात की है लेकिन हम प्रशासनिक जांच के भरोसे नहीं रहेंगे। पार्टी की ओर से भी जांच कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी को जांच कमेटी की अनुशंसा प्रेषित कर दी है।

👉तो क्या NESTS नहीं कर पा रही नियंत्रण

गौरतलब हो कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन वित्तीय वर्ष 2025 -26 से भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था एनईएसटीएस (NESTS) कर रही है। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति ( National Education Society for Tribal Students ) पूरे देश में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का संचालन कर रही है। प्रशासनिक एवं वित्तीय नियंत्रण भी NESTS के अधीन है। लिहाजा NESTS के द्वारा नियुक्त शिक्षकों पर राज्य सरकार का कोई खास नियंत्रण नहीं रह गया है। राज्य सरकार का काम सिर्फ निगरानी व्यवस्था तक सीमित रह गई है।यही वजह है कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हसदेव एक्सप्रेस को विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार कई जिलों के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में सहायक आयुक्त,जिला प्रशासन के जिम्मदार अधिकारी सतत निरीक्षण निगरानी नहीं कर रहे। जिसकी वजह से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक अव्यवस्था की जानकारी जिला प्रशासन राज्य ,केंद्र सरकार तक नहीं पहुंच रही।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) में शिक्षा पूरी तरह से निःशुल्क है। छात्रों के रहने, खाने-पीने, यूनिफॉर्म, किताबों और पढ़ाई के खर्च के लिए सरकार द्वारा स्कूलों को प्रति छात्र प्रति वर्ष ₹1,47,062 का आवर्ती अनुदान (Recurring Grant) निर्धारित किया गया है।
इस बजट का उपयोग छात्र की सीधे तौर पर जरूरतों जैसे भोजन (मेस खर्च), स्कूल ड्रेस, स्टेशनरी, चिकित्सा देखभाल और आवासीय व्यवस्था के संचालन के लिए किया जाता है।
इस तरह देखें तो 400 सीटर वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों को प्रति वर्ष 4 करोड़ रुपए से अधिक का आबंटन मिलता है। इतनी बड़ी राशि मिलने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं की कमी खासकर निर्धारित मीनू अनुसार गुणवत्तायुक्त नाश्ता भोजन नहीं मिलने से जुड़ी खबरें लगातार सामने आ रही है जिसने फंड की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की शाख पर भी खासा असर डाल रही है। जिसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की दरकार है ।