0 स्टाफ निर्धारित कक्षों के अलावा क्लासरूम पर कब्जा नहीं कर सकेंगे
रायपुर। अब प्रदेश के सरकारी हाईस्कूल,हायर सेकेंडरी स्कूलों में पदस्थ प्राचार्यों का दायित्व सिर्फ कुर्सी और फाइल तक सीमित नहीं रहेगी। बल्कि आवश्यकतानुसार प्रतिदिन कम से कम 2 कालखंड (पीरियड )अध्यापन भी करना होगा। यानी प्राचार्य की जिम्मेदारी अब दफ्तर से निकलकर सीधे कक्षा तक पहुंचेगी।स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन ने इस आशय के आदेश जारी कर दिए हैं।
👉प्राचार्यों को प्रतिदिन कम से कम 2 कालखंड


छत्तीसगढ़ के सरकारी हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्राचार्यों की जिम्मेदारियां अब और स्पष्ट कर दी गई हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने 9 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर प्राचार्यों के पदस्थापना संबंधी कार्यों एवं दायित्वों को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।
👉अब प्राचार्य की भूमिका सिर्फ कुर्सी और फाइल तक नहीं
सरकार के आदेश के मुताबिक अब स्कूल के प्राचार्य केवल प्रशासनिक और वित्तीय कामों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आवश्यकतानुसार प्रतिदिन कम से कम दो कालखंड अध्यापन भी करना होगा। यानी प्राचार्य की जिम्मेदारी अब दफ्तर से निकलकर सीधे कक्षा तक पहुंचेगी।
👉प्राचार्य से लेकर स्टाफ तक, कमरे को लेकर भी कड़ा आदेश
शिक्षा विभाग ने स्कूल भवन के ड्राइंग-डिजाइन के अनुसार प्राचार्य, लिपिक और स्टाफ के लिए निर्धारित कक्षों में ही बैठने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा किसी अन्य कक्ष का उपयोग प्राचार्य, लिपिक या स्टाफ के बैठने के लिए नहीं किया जाएगा।
यही नहीं, स्कूलों में मौजूद बड़े-बड़े कक्षों का उपयोग छात्र-छात्राओं के अध्ययन-अध्यापन के लिए करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
👉सरकार ने कहा, निर्देशों का कड़ाई से हो पालन
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। आदेश प्रदेश के सभी शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों से संबंधित है।
सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. कमलप्रीत सिंह के हस्ताक्षर से जारी आदेश की प्रतिलिपि सभी संभागीय संयुक्त संचालकों, जिला शिक्षा अधिकारियों सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों और सभी कलेक्टरों को भी भेजी गई है।
👉अब प्राचार्य की भूमिका सिर्फ कुर्सी और फाइल तक नहीं
सरकार के इस आदेश से साफ है कि प्राचार्यों को प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। रोजाना कम से कम दो कालखंड अध्यापन और स्कूल भवन के कक्षों के निर्धारित उपयोग पर जोर देकर विभाग ने स्कूल व्यवस्था को लेकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है।
