कोरबा। बालको नगर पुलिस थाना क्षेत्र के रजगामार में 7 वर्षीय भव्या की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी अमित उर्फ अजय चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। बालिका का शव विकृति स्थिति में मिला था। उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की बात भी सामने आई।

इस मामले में फॉरेंसिक और मेडिकल जांच के साथ आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं लोगों ने आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर पुलिस चौकी के सामने प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम किया।
चौकी क्षेत्र के अंतर्गत 19 अक्टूबर को बालिका घरेलू सामान लेने के लिए पास की दुकान गई हुई थी। पुलिस के अनुसार ?50 लेकर गई थी और उसने दुकान से ?30 का सामान खरीदा। वापस प्राप्त हुए ?20 लेकर मैं घर लौट रही थी तभी असावधानी बस राशि गुम हो गई। पुलिस ने बताया कि जिस तरह की सूचना इस मामले में प्राप्त हुई है, उसके अनुसार रुपए गुम हो जाने और घर में डांट पढऩे की दर से बालिका फिर से दुकान पहुंची और ?20 को लेकर पूछताछ की। इस दरमियान आरोपी ने उसे बातों में उलझाया और 20 रुपए देने की बात करते हुए नजदीक के जंगल की तरफ ले गया। इसके बाद आगे का घटनाक्रम हुआ और पकड़े जाने के डर से उसने घटना को अंजाम दे डाला। घटना के बाद से वह फरार हो गया। गुरुवार को क्षेत्र के एक जंगल में सर्च ऑपरेशन के दौरान मृतका के परिजनों ने उसका शव अत्यंत खराब स्थिति में देखा जिस पर उन्हें संदेह हुआ कि उसके साथ अनिष्ट हुआ है। पुलिस ने इस प्रकरण में आवश्यक जांच पड़ताल के साथ तथ्यों को एकत्र किया।डॉग स्क्वाड के माध्यम से आरोपी का सुराग हासिल करने के साथ आगे की कार्यवाही की गई और उसे बांगो इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है।
👉हत्यारे को फांसी की सजा देने की मांग
रजगामार में हत्यारे की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भडक़ गया। उन्होंने मौके पर जमकर भड़ास निकालते हुए हत्यारे को फांसी की सजा देने की मांग की। काफी संख्या में लोग एक स्थान पर जुटे और आरोपी की करतूत को लेकर लानत जताई। पुलिस के अनुसार आरोपी की पृष्ठभूमि अच्छी नहीं है और शायद इस कारण से भी उसकी मानसिकता असामान्य है।
👉कठोर कानून के बाद भी सुधार नहीं
महिला संबंधी अपराधों के उन्मूलन को लेकर सरकार ने नियमों को अत्यंत कठोर किया है और ऐसे मामलों में सजा का प्रावधान किया है। बालिकाओं से लेकर किशोरी और महिलाओं से संबंधित हिंसात्मक व्यवहार के मामले में न केवल अलग से सेल बनाई गई है बल्कि इन पर त्वरित और अत्यंत सख्त कार्रवाई करने के फरमान भी सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जारी किए गए हैं। इसके पीछे उद्देश्य है कि आपराधिक मानसिकता रखने वालों के मन में कानून का डर पैदा किया जाए और वह इस तरह की घटनाओं को करने से पहले 100 बार जरूर सोचें। लेकिन बहुत सारे मामलों में कमजोर विवेचना और साक्षी के मुकरने के कारण अपराधी बच निकलते हैं। इस वजह से भी उनके हौसले मजबूत हो रहे हैं। जरूरत बताई जा रही है कि जब तक इस तरह की घटनाओं को लेकर कार्यवाही के तौर तरीके नहीं बदलेंगे और एक्शन की रफ्तार तेज नहीं होगी, तस्वीर में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आने वाला है।
