रायपुर । शासन की ‘प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति’ (AFRC) ने रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (RIMS) में MBBS प्रथम वर्ष के छात्रों से हॉस्टल, मेस और ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर दबाव बनाकर भारी भरकम फीस वसूलने की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लिया है। समिति ने कॉलेज प्रबंधन को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर सुसंगत प्रावधानों के साथ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
👉जानें क्या है पूरा मामला?

समिति को मिली शिकायत के अनुसार, रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस द्वारा MBBS प्रथम वर्ष में प्रवेशित छात्रों से हॉस्टल, मेस और ट्रांसपोर्ट शुल्क के रूप में प्रति छात्र 5,60,000/- रुपये की दबावपूर्ण वसूली की जा रही थी। छात्र संकल्प वाजपेयी के पालक श्री निश्चय वाजपेयी ने 21 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि छात्र को हॉस्टल की सुविधा की आवश्यकता नहीं है और वह ‘डे-स्कॉलर’ (दिन में आकर पढ़ाई करने वाले छात्र) के रूप में रहना चाहता है। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन द्वारा उन पर जबरन हॉस्टल और अन्य सुविधाओं का शुल्क देने का दबाव बनाया जा रहा था।
👉समिति का रुख और निर्देश
प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ. एस.के. पांडेय द्वारा जारी इस शासकीय पत्र में स्पष्ट किया गया है कि:
👉हॉस्टल अनिवार्य नहीं
छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा का उपभोग करना किसी भी तरह से बंधनकारी (Mandatory) नहीं है और किसी छात्र को डे-स्कॉलर होने से नहीं रोका जा सकता।
👉वैकल्पिक सुविधाएं:
समिति द्वारा पूर्व में पारित संकल्प के अनुसार हॉस्टल, मेस और ट्रांसपोर्टेशन की सुविधाएं पूरी तरह से वैकल्पिक हैं। प्रत्येक छात्र/छात्रा के लिए इनका उपयोग करना अनिवार्य नहीं है।
👉“न लाभ न हानि” का सिद्धांत:
छात्रावास, मेस एवं ट्रांसपोर्टेशन शुल्क केवल उन छात्रों से लिया जाएगा जो इसका वास्तव में उपयोग कर रहे हैं। यह शुल्क “न लाभ न हानि” (NO PROFIT NO LOSS) के आधार पर लिया जाना चाहिए।
👉अंतिम निर्देश
समिति ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक इस शिकायत का अंतिम निराकरण नहीं हो जाता, तब तक यदि कोई छात्र हॉस्टल की सुविधा का उपयोग नहीं करना चाहता, तो उस पर किसी भी प्रकार का दबाव न डाला जाए और उसे डे-स्कॉलर के रूप में अध्ययन करने की पूर्ण अनुमति दी जाए। कॉलेज प्रशासन से 7 दिनों के भीतर इस विषय में जवाब तलब किया गया है।
