दीपका/कोरबा। एसईसीएल दीपका क्षेत्र के सभागार में प्रबंधन और ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के पदाधिकारियों तथा प्रभावित ग्रामों के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप के नेतृत्व में हुई इस बैठक में भूविस्थापितों के लंबित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार, स्वरोजगार और प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रबंधन ने समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उनके निराकरण के लिए सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
बैठक में एसईसीएल दीपका के महाप्रबंधक शरद तिवारी, खनन परियोजना अधिकारी नागेंद्र साहू, भू-राजस्व अधिकारी सुशील साहू तथा लैंड एंड रिहैबिलिटेशन (एलएंडआर) विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
👉सुवाभोड़ी के 64 परिवारों के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठा

बैठक में सुवाभोड़ी के 64 स्वीकृत परिवारों के मकान एवं परिसंपत्तियों के मुआवजा भुगतान में जीपीएस (GPS) की बाध्यता के कारण हो रही देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। समिति ने इस बाध्यता को समाप्त कर पात्र परिवारों को जल्द भुगतान करने की मांग की।
इसके अलावा निर्धारित ₹10 लाख की बसाहट राशि के अतिरिक्त देय ₹5 लाख की प्रोत्साहन राशि का शीघ्र भुगतान करने, मकान ध्वस्तीकरण के समय बालिग हो चुके युवक-युवतियों को नियमानुसार पृथक बसाहट का लाभ देने तथा पेड़-पौधे, शौचालय, बाउंड्रीवाल और पटाव जैसी छूटी हुई परिसंपत्तियों का मुआवजा देने की मांग रखी गई। मृत व्यक्तियों के नाम स्वीकृत राशि उनके वैध वारिसों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
👉1986 से लंबित रोजगार प्रकरणों की समीक्षा की मांग
समिति ने वर्ष 1986 में अर्जित भूमि के बदले रोजगार से वंचित रह गए परिवारों का मुद्दा भी उठाया। समिति के अनुसार, अलग-अलग खातों को जोड़ने के कारण कई परिवार रोजगार के लाभ से वंचित रह गए हैं। ऐसे मामलों का तत्कालीन नियमों और प्रावधानों के आधार पर पुनर्मूल्यांकन कर पात्र भूविस्थापितों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की गई।
👉निविदा सीमा ₹20 लाख करने का प्रस्ताव
भूविस्थापित परिवारों को स्वरोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए समिति ने निविदाओं की वर्तमान ₹5 लाख की सीमा बढ़ाकर ₹20 लाख करने की मांग की। साथ ही स्थानीय ठेकेदारों के साथ कथित भेदभाव समाप्त कर उन्हें समान अवसर देने पर जोर दिया गया, ताकि प्रभावित परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
👉पुनर्वास गांवों में सड़क, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग
समिति ने पुनर्वास ग्रामों में पक्की सड़क, स्वच्छ पेयजल, बेहतर नाली व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं प्राथमिकता से उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही खनन गतिविधियों से होने वाले पर्यावरणीय दुष्प्रभावों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय करने की आवश्यकता भी बताई गई।
बैठक में सुवाभोड़ी, मलगांव, झाबर, सिरकी खुर्द, बेलटिकरी और चैनपुर सहित अन्य अर्जित ग्रामों के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं रखीं। समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी बसंत कुमार कंवर, विजय पाल सिंह तंवर, अनुसुईया राठौर, रविंद्र जगत, दीपक कुमार यादव, ललित महिलांगे, ईश्वर आमरेक्सन, चैनपुर सरपंच विनोद टेकाम, राजेश जगत सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।
👉समस्याओं के निराकरण के लिए प्रबंधन करेगा गांवों का दौरा
एसईसीएल दीपका के महाप्रबंधक शरद तिवारी ने समिति की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि भूविस्थापित परिवारों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन का इंतजार नहीं करना चाहिए। वे सीधे उनसे मिलकर अपनी समस्याएं रख सकते हैं। प्रबंधन पुनर्वास ग्रामों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेगा और निर्धारित समय-सीमा में समस्याओं के निराकरण का प्रयास करेगा।
👉संवाद और समयबद्ध समाधान पर जोर
समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कहा कि संगठन अकारण विरोध या आंदोलन के पक्ष में नहीं है। समिति निरंतर संवाद और समस्याओं के समयबद्ध समाधान में विश्वास रखती है।
उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा जरूरतों और औद्योगिक प्रगति के लिए भूविस्थापितों ने अपनी जमीन, घर और आजीविका का त्याग किया है। ऐसे में उनकी जायज मांगों और बुनियादी अधिकारों की पूर्ति करना प्रबंधन का नैतिक एवं कानूनी दायित्व है। समिति को उम्मीद है कि प्रबंधन केवल आश्वासन तक सीमित न रहकर मांगों पर त्वरित और ठोस निर्णय लेगा।
बताया गया कि ग्रामीण बैठकों में सामने आई समस्याओं के आधार पर एसईसीएल प्रबंधन ने इस बैठक का आयोजन किया था, जिसमें प्रभावित ग्रामीणों को अपनी बात रखने का अवसर मिला।
