KORBA : हड़ताल बना हॉलिडे पैकेज ! आवेदन देकर धरने की जगह अधिकारी कर्मचारी निकल पड़े सैर सपाटे पर ,संगठन दगाबाजी से नाराज ,पदाधिकारियों ने कहा – लेंगे खबर …..

कोरबा। सेवानिवृत्ति ,वेतन विसंगति समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय आव्हान पर आयोजित 3 दिवसीय हड़ताल अवसर परस्त अधिकारी कर्मचारियों के लिए हॉलिडे टूर बन गया । जोर शोर से हड़ताल का ऐलान करने वाले कर्मचारी धरना स्थल की जगह पर्यटन केंद्रों में सैर सपाटे लगाते नजर आ रहे।

जिले के शासकीय सेवकों ने 3 दिवसीय हड़ताल का ऐलान तो बड़े जोश से किया, लेकिन धरना स्थल पर जो नज़ारा दिखा, वह सरकार से ज्यादा पर्यटन विभाग के लिए राहत भरा साबित हो रहा है।

29 से 31 दिसंबर तक हड़ताल के चलते कलेक्टोरेट से लेकर स्कूलों तक ताले लटके हैं। दफ्तरों में सन्नाटा है और स्कूलों में शिक्षक ऐसे गायब हैं जैसे उन्हें एलआईसी की पॉलिसी के साथ अदृश्य होने का बोनस मिल गया हो। परीक्षा सिर पर है, पाठ्यक्रम अधूरा है, लेकिन शिक्षक महोदय “आंदोलन मोड” में नहीं, बल्कि “टूर मोड” में नजर आ रहे हैं।
हड़ताल का आवेदन देना भर औपचारिकता रह गई है। एक तय फार्मेट में सूचना दी और फिर सीधे कुल्लू-मनाली, गोवा, ऋषिकेश, केरल, दिल्ली, प्रयागराज, बालाजी मंदिर, नेपाल जैसे गंतव्यों की ओर प्रस्थान। मानो हड़ताल नहीं, कोई ऑल इंडिया टूर पास जारी हो गया हो।

शीतकालीन अवकाश से लौटने वाले शिक्षकों के लिए तो यह हड़ताल सोने पर सुहागा साबित हुई। जिस दिन स्कूल खुलने थे, उसी दिन हड़ताल का ऐलान हो गया और छुट्टी एक्स्ट्रा हॉलीडे बोनस में तब्दील हो गई।

👉न अनुमति की झंझट, न सूचना की टेंशन

धरना स्थल पर हालात यह हैं कि गिनती के कुछ बड़े पदाधिकारी ही कुर्सी संभाले बैठे दिखते हैं। बाकी अधिकारी-कर्मचारी कहां हैं, किस दिशा में हैं, किस टूर पैकेज पर हैं, इसकी जानकारी शायद जीपीएस को भी नहीं। कुल मिलाकर, यह हड़ताल सरकार पर दबाव बनाने से ज्यादा कर्मचारियों के लिए “वर्क फ्रॉम नो-व्हेयर” और “धरना फ्रॉम टूरिस्ट स्पॉट” साबित हो रही है। मांगें पूरी हों या न हों, सैर-सपाटा जरूर सफल होता दिख रहा है।

👉बड़े विभागों के लिपिक भी धरना स्थल से नदारद

3 दिवसीय हड़ताल में राजस्व, शिक्षा,महिला एवं बाल विकास ,आदिवासी विकास विभाग,कृषि विभाग ,खनिज विभाग ,आबकारी विभाग ,जनपद पंचायत ,पीएचई ,पीडब्ल्यूडी आरईएस , पीएमजीएसवाय ,जल संसाधन , वन विभाग समेत समस्त विभागों के नियमित अधिकारी कर्मचारी हड़ताल में हैं। लेकिन इन विभागों के अधिकांश अधिकारियों की उपस्थिति धरना स्थल में नगण्य रही है। इन विभागों के कई कर्मचारी हड़ताल अवधि के बीच ही मौके का फायदा उठाकर सैर सपाटे में निकल गए हैं। इन अधिकारी कर्मचारियों ने मानो संगठन को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि हक की इस लड़ाई में वे कागजी तौर पर संगठन के साथ खड़े हैं लेकिन अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं करा सकते। अगुवाई पदाधिकारियों को ही करनी होगी। संगठन के पदाधिकारियों ने हसदेव एक्सप्रेस से ऐसे अधिकारी कर्मचारियों के चिन्हांकन उपरांत नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की बात कही है।दगाबाजी से संगठन बेहद नाराज है।