कोरबा । छत्तीसगढ़ राज्य ने देश में पहली बार एक अभिनव मॉडल लागू किया है, जिसके तहत पहाड़ी कोरवा (विशेष रूप से संवेदन शील जनजातीय समूह – PVTG) परिवारों के प्रधानमंत्री जनमन आवास घरों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य राज्य के सबसे गरीब जनजातीय परिवारों को पक्का घर देने के साथ-साथ लगभग शून्य बिजली बिल सुनिश्चित करना है।

पहला चरण में कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ गुदुरुमुड़ा गांव में पहाड़ी कोरवा परिवारों के आठ घरों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के अधिकारियों के अनुसार, यह देश में पहली बार है जब पीएम जनमन आवास और पीएम सूर्य घर योजना को औपचारिक रूप से इस तरह जोड़ा गया है, ताकि PVTG परिवारों को एक साथ आवास और सुनिश्चित सौर ऊर्जा मिल सके ।
CSPDCL के प्रबंध निदेशक भीम सिंह ने बताया कि यह परियोजना इस उद्देश्य से तैयार की गई है कि पीएम सूर्य घर के लाभ वास्तव में जरूरतमंद और दूरदराज के परिवारों तक पहुंचें। इसके लिए पीएम आवास, पीएम जनमन मिशन और डीएमएफ (जिला खनिज निधि) के संसाधनों को पहली बार जमीनी स्तर पर एक साथ जोड़ा गया है। उन्होंने कहा यह अभी एक पायलट परियोजना है, लेकिन इसकी सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक नई दिशा दिखाएगी।”
आम तौर पर पीएम आवास जैसी योजनाओं में घर निर्माण का प्रावधान होता है, लेकिन मुफ्त या सुनिश्चित बिजली कनेक्शन की गारंटी नहीं होती। वहीं, पीएम सूर्य घर योजना रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देती है, पर PVTG आवास लाभार्थियों से इसका स्वतः जुड़ाव नहीं होता। इस नई पहल ने दोनों के बीच की इस खाई को पाट दिया है।
इन आठों घरों में पीएम सूर्य घर योजना के तहत 1 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट लगाया गया है। एक 1 किलोवाट प्रणाली की अनुमानित लागत ₹60,000 है, जिसमें से लगभग ₹45,000 केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से और शेष ₹15,000 डीएमएफ से वहन किया गया है, जो खनन राजस्व से संचालित होती है।
इन संसाधनों को मिलाकर राज्य ने अत्यंत हाशिए पर रहने वाले परिवारों के लिए स्थायी, स्वच्छ और मुफ्त बिजली का मार्ग तैयार किया है, ताकि केवल घर देकर उन्हें बार-बार आने वाले बिजली बिलों के बोझ से जूझना न पड़े।
“अब हमारी ज़िंदगी सोलर से चलेगी”
गुदुरुमुड़ा गांव में इस पहल का असर तुरंत और स्पष्ट दिख रहा है। अधिकांश पहाड़ी कोरवा परिवार कृषि मजदूरी और दिहाड़ी पर निर्भर हैं, जिनकी आय अनियमित रहती है।
लाभार्थी मंगलू राम के पोते ने कहा अब हमारी ज़िंदगी सोलर से चलेगी। हम खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। पहले बिजली का बिल भरना बहुत मुश्किल था। अब सोलर से हमारी ज़रूरतें पूरी होंगी और हर महीने अतिरिक्त पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे।”इसी तरह अन्य परिवारो ने बताया कि वे अपने दम पर कभी ऐसा सिस्टम लगाने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे ,लेकिन क्षेत्र के विद्युत कनिष्ठ यंत्री शब्बीर साहू की अहम भूमिका रहा एवं कोरवा परिवारों के बीच जाकर जानकारी देते हुए आज इस मुकाम पर पहुंच गया है कि आठ परिवारों को सोलर बिजली का लाभ मिल रहा है इस पायलट की सफलता के आधार पर, कोरबा जिले के अन्य PVTG-बहुल गांवों में और आगे चलकर राज्य के अन्य जिलों में भी ऐसे समेकित (कन्वर्जेन्स) प्रोजेक्ट लागू करने की योजना है ,जहां ग्रिड बिजली आपूर्ति अस्थिर है और बिल वहन करना कठिन है, वहां लक्षित सब्सिडी और डीएमएफ सहयोग से विकेंद्रीकृत रूफटॉप सोलर घरेलू अर्थव्यवस्था को बदल सकता है। मासिक बिजली बिल समाप्त होने और बिजली की स्थिर उपलब्धता से भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे, साथ ही डीज़ल उपयोग में कमी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
फिलहाल, गुदुरुमुड़ा के आठ पहाड़ी कोरवा परिवार इस बदलाव को जी रहे हैं। उनके नए पक्के घरों की छतों पर लगे सोलर पैनल सिर्फ बिजली नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और उम्मीद भी पैदा कर रहे हैं—और संभव है कि यही मॉडल भविष्य में देशभर की कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक उदाहरण बने।।
