CG :साय सरकार में न्याय के लिए कोतवाली गेट पर अनशन के लिए बैठ गए यह तहसीलदार ,पुलिस की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल….

सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में कानून-व्यवस्था की हकीकत उस वक्त सामने आ गई, जब फरियाद लेकर आम आदमी नहीं, बल्कि खुद एक तहसीलदार को धरने पर बैठना पड़ा। सारंगढ़–बिलाईगढ़ के सारंगढ़ कोतवाली थाना के मुख्य गेट पर तहसीलदार वन्दे राम भगत अनशन पर बैठ गए। यह दृश्य किसी आंदोलनकारी का नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र की संवेदनहीनता और लचर कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा माना जा रहा है।

मामला दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थान पर हुई मारपीट से जुड़ा है। पीड़ित राहुल भगत द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करना जरूरी नहीं समझा। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब न्याय नहीं मिला, तो मजबूरन पिता और तहसीलदार वन्दे राम भगत को अपनी कुर्सी और कलम छोड़कर अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा।

तहसीलदार के अनशन पर बैठते ही इलाके में चर्चा तेज हो गई। लोगों का कहना है कि जब एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो आमजन—गरीब, मजदूर, महिलाएं और कमजोर तबके—न्याय की उम्मीद लेकर आखिर किस दरवाजे पर जाएं। कोतवाली गेट पर बैठे तहसीलदार का यह कदम थाना की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

खबर फैलते ही थाना परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था—क्या न्याय पाने के लिए अब अफसरों को भी भूखा रहना पड़ेगा? लोगों ने इसे सिस्टम की बड़ी विफलता करार दिया।

सूत्रों के अनुसार, मामला अब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है, लेकिन जनता टकटकी लगाए यह देखने को मजबूर है कि पहले पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज होती है या अनशन लंबा चलता है।
पूरे घटनाक्रम में पुलिस के आला अधिकारी भी असहज नजर आए। स्नेहिल ने न तो स्पष्ट बयान दिया और न ही जिम्मेदारी लेने से आगे बढ़े। कभी प्रमोशन तो कभी टीआई की अनुमति का हवाला देकर टालमटोल की जाती रही, जिससे आमजन में आक्रोश और बढ़ गया।
यह घटना सिर्फ एक शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस और प्रशासन के बीच बिगड़ते तालमेल, ढीली व्यवस्था और टूटते जनविश्वास की कहानी बयां करती है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले से सबक लेकर त्वरित कार्रवाई करता है या फिर यह अनशन भी फाइलों में दबकर व्यवस्था पर लगे दागों की सूची में एक और नाम जोड़ देगा।