दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग (ECI) ने कहा कि SIR प्रक्रिया में सभी राज्यों में नियमों का सही ढंग से पालन करना चाहिए। तमिलनाडु में जिन लोगों का नाम स्पेलिंग एरर के चलते काटा गया है। उनकी लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, सब-डिवीजन के तालुका ऑफिस और शहरी इलाकों के वार्ड ऑफिस में लगाई जाए।

उधर याचिकाकर्ता की तरफ से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील दी कि चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता है। चुनाव अधिकारी यह कैसे तय कर सकता है कि कोई नागरिक है या नहीं? वे कोई अदालत नहीं है। अगर विवाद हो तो जिरह का मौका मिलना चाहिए।
प्रशांत भूषण ने दलील दी कि नई वोटर लिस्ट बनाने की कोशिश में महिलाओं के नाम कट रहे हैं। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। गरीब और कमजोर लोगों पर बोझ डाला गया। वोटर को खुद फॉर्म भरने की जिम्मेदारी दी गई है। जो अनपढ़ हैं या प्रवासी हैं वो फॅार्म नहीं भर पा रहे हैं।
👉एक दिन पहले बिहार मामले में हुई थी सुनवाई
इससे पहले बिहार में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआइआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नामों को जोड़ना या हटाना मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने आधार कार्ड की स्वीकार्यता पर भी बड़ा रुख अपनाया।
पीठ ने कहा कि केवल धोखाधड़ी की संभावना के आधार पर 12 अंकों वाले इस बायोमेट्रिक पहचान पत्र को खारिज नहीं किया जा सकता। जजों ने तर्क दिया कि यदि कोई दस्तावेज कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है, तो उसे केवल इसलिए नहीं नकारा जा सकता क्योंकि उसके जारी होने में किसी निजी इकाई की भूमिका है। मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोप लगाए।
