रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजस्व निरीक्षक (आरआई) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अपनी जांच पूरी कर न्यायालय में लगभग 3000 पृष्ठों का प्रथम चालान जमा किया है।
इस मामले में सहायक सांख्यिकी अधिकारी विरेंद्र जाटव और हेमंत कुमार कौशिक को मुख्य आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
👉पैसे लेकर परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक

जांच में सामने आया है कि 7 जनवरी 2024 को प्रस्तावित आरआई परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक कर दिए गए थे। प्रश्नपत्र चुनिंदा अभ्यर्थियों को मोटी रकम लेकर उपलब्ध कराए गए थे। इसके साथ ही, कुछ अभ्यर्थियों को होटलों और अन्य स्थानों पर ठहराकर प्रश्न हल करने का अभ्यास भी कराया गया।
👉डिजिटल साक्ष्यों से खुलासा
चलान में कहा गया है कि जांच में यह पुष्टि हुई कि 100 से अधिक अभ्यर्थियों तक प्रश्नपत्र पहुंचा था। डिजिटल साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) विश्लेषण से यह भी सामने आया कि परीक्षा से एक रात पहले कई अभ्यर्थियों और आरोपियों की लोकेशन एक ही स्थान पर पाई गई। इससे यह साबित होता है कि प्रश्न सामग्री अलग-अलग होटलों, फार्महाउस और रिसॉर्ट्स में वितरित की गई थी।
👉अभ्यर्थियों को समूह में ठहराया गया
जांच में यह भी पता चला कि अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थियों को समूह में ठहराया गया और उन्हें प्रश्न पढ़कर लिखवाए गए। इसके बाद लिखी गई सामग्री को नष्ट करने के निर्देश दिए गए, ताकि साक्ष्य मिटाए जा सकें। इस पूरी प्रक्रिया में आरोपियों के कुछ रिश्तेदारों की भी भूमिका सामने आई है।
👉 परीक्षा परिणामों में असामान्य पैटर्न
विशेषज्ञों ने परीक्षा परिणामों का विश्लेषण किया, जिसमें साथ ठहरे अभ्यर्थियों के अंक और उत्तरों में उल्लेखनीय समानता पाई गई। इससे यह संकेत मिलता है कि अभ्यर्थियों ने साझा प्रश्नपत्र का उपयोग किया और समान तैयारी की। जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले में अभी और पहलुओं की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
