रायगढ़ । नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर प्रकरण में न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी को कठोर दंड दिया है। मामला पुसौर थाना क्षेत्र का है, जहां एक नाबालिग लड़की के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में आरोपी को दोषी ठहराया गया। प्रकरण के अनुसार, पीड़िता के परिजनों ने पुसौर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग बेटी 14 सितंबर 2024 को गांव के तालाब में नहाने के लिए गई थी। इसी दौरान गांव के ही निवासी गणेश उरांव (20 वर्ष) ने कथित रूप से तालाब के पास उसे बहला-फुसलाया और अपने घर ले गया। आरोप है कि आरोपी ने वहां नाबालिग के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। घटना के बाद पीड़िता ने अपने परिजनों को पूरी आपबीती बताई। परिजनों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुसौर थाना पुलिस ने अपराध दर्ज कर विधिवत जांच प्रारंभ की।
जांच के दौरान आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए और पीड़िता सहित संबंधित गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायालय एफटीएससी (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) पॉक्सो में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रकरण से जुड़े तथ्य, पीड़िता के बयान तथा अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विद्वान न्यायाधीश देवेन्द्र साहू ने आरोपी को दोषी पाया।
न्यायालय ने आरोपी गणेश उरांव, निवासी सोडेकेला, को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त आरोपी पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि आरोपी जुर्माने की राशि अदा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त चार माह का कारावास भुगतना होगा।इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक मोहन सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय के इस निर्णय को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के प्रति न्यायपालिका के कठोर दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है।
