रायगढ़: ‘प्रोजेक्ट पेलमा’ कोयला खदान के कारण होने वाले विस्थापन और पर्यावरण के विनाश को लेकर स्थानीय मछुआरा समाज और राष्ट्रीय मछुआरा संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने आगामी 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लेते हुए कलेक्टर महोदय को ज्ञापन सौंपा है।

आजीविका पर संकट और जल स्रोतों का विनाश
राष्ट्रीय मछुआरा संघ के प्रदेशाध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ) सुरेश ढीमर ने कहा कि इस परियोजना से लगभग 14 गांवों के ग्रामीण विस्थापित होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी स्थानीय नदी, नालों और तालाबों पर टिकी है। कोयला खदान आने से न केवल भूजल स्तर गिरेगा, बल्कि खदानों का जहरीला पानी जल स्रोतों को प्रदूषित कर देगा, जिससे मछलियां मर जाएंगी और पारंपरिक मछुआरा समाज भुखमरी की कगार पर आ जाएगा।
लाखों पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय चिंता
संघ ने आपत्ति जताई है कि इस प्रोजेक्ट के लिए लाखों पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्र में भीषण गर्मी और सूखे की स्थिति उत्पन्न होगी। ग्रामीणों का कहना है कि “विकास” के नाम पर उनसे उनकी पुरखों की जमीन और जंगल छीने जा रहे हैं, जो उन्हें कतई स्वीकार नहीं है।
प्रमुख मांगें:
19 मई को होने वाली जनसुनवाई को तत्काल निरस्त किया जाए।
जल स्रोतों और मछुआरों की आजीविका पर होने वाले नुकसान का निष्पक्ष आकलन हो।
जब तक जल, जंगल और जमीन के अधिकार सुरक्षित नहीं होते, परियोजना पर रोक लगे।
औद्योगिक विकास से पहले स्थानीय निवासियों की सहमति को प्राथमिकता दी जाए।
उपस्थिति:
ज्ञापन सौंपने और विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से सुरेश ढीमर (प्रदेशाध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ), कैलाश निषाद (खरसिया विधानसभा अध्यक्ष), गिरधारी लाल निषाद (लैलूंगा विधानसभा अध्यक्ष), राजकुमार निषाद (उपाध्यक्ष, रायगढ़ विधानसभा), गुन्नू राम निषाद (जिला संयोजक, भाजपा मछुआरा प्रकोष्ठ), चित्रसेन निषाद (अध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ रायगढ़), कौशल जलतारे (उपाध्यक्ष, युवा प्रकोष्ठ), अनिल निषाद (जिला कार्यकारिणी, भाजपा मछुआरा प्रकोष्ठ) सहित मनीष निषाद, विशाल निषाद, रितेश निषाद एवं भारी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
