KORBA : सुशासन सरकार में वन विभाग का सुनियोजित भ्रष्टाचार ! वॉच टॉवर – 5 ,जांच एवं संवाद हीनता से भागे…..

कोरबा। कोरबा वन मंडल के अंतर्गत कोरबा रेंज के ग्राम भुलसीडीह में भ्रष्टाचार का वॉच टावर काम कर रहे मिस्त्री(मजदूर) की जान आफ़त में डाल चुका है। एक तो घटिया सामग्रियों के साथ गुणवत्ताहीन निर्माण और व्यापक पैमाने पर उजागर होता भ्रष्टाचार तो दूसरी तरफ घटिया निर्माण के कारण सीढ़ी टूटने से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए मिस्त्री के इलाज और आर्थिक राहत में घोर उपेक्षा उजागर होने के बाद भी वन विभाग के अधिकारी पूरे मामले को दबाने में जुटे हुए हैं। इस मामले में डीएफओ से लेकर एसडीओ तक रेंजर और ठेकेदार को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं।

👉 विभागीय और राजनीतिक संरक्षण ने बढ़ाया मनोबल

इस पूरे मामले में जबकि घटिया निर्माण की बात बार-बार सामने आ रही है और वह प्रमाणित भी हुआ है बावजूद इसके भ्रष्टाचार में सम्मिलित रेंजर को वन विभाग के अधिकारी पूर्ण रूप से संरक्षण दिए हुए हैं। विभागीय और कहीं ना कहीं राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रेंजर पर किसी तरह की जिम्मेदारी ना तो तय हो रही है, ना तो इस मामले में जांच की कोई सुगबुगाहट सुनाई पड़ रही है। शीर्ष अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही, तो भला ऐसे में कैसे माना जाए कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की मंशा को वन विभाग के अधिकारी चरितार्थ कर रहे हैं। इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की संवादहीनता लगातार बनी हुई है। फोन लगाने पर फोन उठाना या कॉल बैक करना भी जरूरी नहीं समझते। व्हाट्सएप के जरिए पूरी जानकारी देने के बाद भी उसका जवाब देना जरूरी नहीं समझते।

👉अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते वन अधिकारी

निर्माण कार्य में लगे राकेश खड़िया को 550 रुपए और उसकी पत्नी कलेश्वरी को मात्र 250 रुपये की मजदूरी का भुगतान ठेकेदार शेखर श्रीवास के द्वारा किया जा रहा था। घटिया सीढ़ी टूटने के कारण गिरे राकेश खड़िया की अंतड़ी फट गई, सीने और सिर में चोट लगी। उसके इलाज में अपेक्षित सहयोग प्रदान नहीं किया गया। हादसे के बाद अब यह मजदूर परिवार संकट के दौर से गुजर रहा है। इस प्रकार से यह मामला सिर्फ “कम मजदूरी” का नहीं बल्कि श्रम कानून, सुरक्षा और जिम्मेदारी का भी बनता है।
वन विभाग के वॉच टावर निर्माण जैसे कार्य में यदि विभागीय काम को नियमों के विपरीत ठेकेदार से कराया जा रहा था और उसी दौरान हादसा हुआ, तो कई स्तरों पर जवाबदेही तय हो सकती है, किंतु करेगा कौन? यह काम वन विभाग का है, कार्यस्थल विभागीय नियंत्रण में है, और ठेकेदार के माध्यम से मजदूर लगाए गए थे, तो सामान्यतः जिम्मेदारी केवल मजदूर पर नहीं छोड़ी जा सकती। संभावित जिम्मेदार पक्ष में संबंधित ठेकेदार है क्योंकि मजदूरों को उसने लगाया और काम कराया। वन विभाग व संबंधित अधिकारी की जानकारी और अनुमति से कार्य हो रहा है, तो विभाग “प्रमुख नियोक्ता” की श्रेणी में आता है। रेंजर सहित जिम्मेदार अधिकारी ने नियम विरुद्ध तरीके से काम कराया,साथ ही सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे, बिना वैधानिक प्रक्रिया के काम कराया जा रहा था, जिससे मामला गंभीर है। गंभीर घायल मिस्त्री के के इलाज का खर्च,मुआवजा, अस्पताल खर्च, कार्यस्थल दुर्घटना क्षतिपूर्ति देने की जिम्मेदारी बनती है। वन विभाग के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ने की फिराक में हैं कि “मजदूर हमारे नहीं थे”, तब भी वास्तविक नियंत्रण और लाभ तो इन्हीं का है। केवल ठेकेदार का नाम आगे कर देने से विभाग पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।

सोर्स -सत्यसंवाद डॉट कॉम