KORBA : आकांक्षी जिला कोरबा में फरवरी माहाँत तक नहीं मार्कफेड नहीं उठा सका धान, हाथी प्रभावित केंद्र में रखवाली कर रहे फड़ प्रभारी ने बीती रात दंतैल हाथी के हमले में गंवाई जान,घटना CCTV में कैद,बदइंतजामी से सहकारी कर्मचरियों में आक्रोश ,उठे सवाल , जिम्मेदारों पर क्या दर्ज होगा FIR !

हसदेव एक्सप्रेस न्यूज कोरबा। आकांक्षी जिला कोरबा में मार्कफेड की बदइंतजामी से समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का उठाव पहली बार फरवरी माहाँत तक भी पूरा नहीं हो सका। मार्कफेड के अफसरों का दावा थोथा चना बाजे घना जैसा साबित हुआ। वहीं धान के उठाव की लचर परिवहन व्यवस्था से अब समिति के कर्मचारियों की जान आफत में आ गई है। बीती रात 1.34 बजे कोरकोमा समिति के कुदमुरा उपार्जन केंद्र में 1100 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 27 लाख 57 हजार रुपए से अधिक की शासकीय धान की रखवाली कर रहे फड़ प्रभारी राजेश सिंह पिता शशिकांत सिंह की एक दंतैल हाथी ने जान ले ली । इस हृदय विदारक घटना से पूरे जिले में हड़कम्प मच गया । आज सुबह सहकारी समिति कर्मचारी कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों सदस्यों ने मृतक साथी कर्मचारी के आश्रितों को तत्काल 10 हजार रुपए सहयोग राशि देकर घटना पर चिंता जताते हुए उपस्थित अधिकारियों के समक्ष हाथी प्रभावित धान खरीदी केंद्रों से तत्काल धान के उठाव ,सुरक्षा के प्रबंध करने की बात कही। वन विभाग ने भी हाथी के हमले से होने वाली मौत पर दी जाने वाली 6 लाख रुपए की अनुग्रह राशि में से 25 हजार रुपए की सहायता राशि तत्काल प्रदान की है। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है जिसने सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

यहाँ बताना होगा कि आकांक्षी जिला कोरबा में समर्थन मूल्य पर की जा रही धान खरीदी अभियान 2 दिन बढ़ाई गई मियाद के साथ 7 फरवरी तक विराम लग गया है। जिले में 43 हजार 681 किसानों ने समर्थन मूल्य पर 27 लाख 47 हजार 101 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742.80 रुपए का धान बेचा। कायदे से समितियों में खरीदे गए धान का उठाव न्यूनतम 72 घण्टे अधिकतम 10 दिवस के भीतर हो जाना चाहिए। लेकिन शासन की धान परिवहन नीति में ढिलाई की वजह से इस साल ऐसी बदइंतजामी रही कि फरवरी माह बीतने के उपरांत भी शत प्रतिशत धान का उठाव नहीं हो सका। जिसकी मूल वजह जिले में खरीदे गए धान का निराकरण करने की जगह अन्य जिलों में खरीदे गए साढ़े 9 लाख क्विंटल से अधिक के धान के उठाव का डीओ जारी करने , जनवरी एंड में 10 दिनों तक डीओ जारी होने के उपरांत शासन स्तर से धान के उठाव पर रोक लगाया जाना मानी जा रही है। इन सबकी वजह से डेढ़ दशक बाद मार्च माह में भी उपार्जन केंद्रों में करोड़ों रुपए के लाखों क्विंटल धान जाम पड़े हैं ,नतीजन समितियों को जीरो शार्टेज धान दे पाना असंभव सा प्रतीत हो रहा है। वहीं आर्थिक नुकसान के साथ अब समिति प्रबंधकों की करोड़ों रुपए के शासकीय धान की रखवाली चौकीदारी करते जान आफत में आ बनी है। जान हथेली में लेकर धान की रखवाली कर रहे।।बीती रात 1 बजकर 34 बजे कोरकोमा समिति के हाथी प्रभावित उपार्जन केंद्र कुदमुरा में एक दंतैल हाथी ने 1100 क्विंटल लगभग 26 लाख रुपए के धान की रखवाली कर रहे फड़ प्रभारी प्रभारी राजेश सिंह पिता शशिकांत सिंह की जान ले ली । इस हृदय विदारक घटना से पूरे जिले में हड़कम्प मच गया ।

आज सुबह सहकारी समिति कर्मचारी कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों सदस्यों ने दिवंगत साथी कर्मचारी के आश्रितों को तत्काल 10 हजार रुपए की सहयोग राशि देकर घटना पर चिंता जताते हुए उपस्थित अधिकारियों के समक्ष हाथी प्रभावित धान खरीदी केंद्रों से तत्काल धान के उठाव ,सुरक्षा के प्रबंध करने की बात कही। उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं एम आर ध्रुव की मौजूदगी में संघ के पदाधिकारी विनोद भट्ट, वेद प्रकाश वैष्णव , तुलेश्वर कौशिक ,चंद्रशेखर कैवर्त , अशोक दुबे,दुलीचंद धीवर ,कमल दुबे,मुरली मनोहर दुबे, दिनेश पटेल ,दुर्योधन कंवर, शशिकांत वैष्णव कोरकोमा समिति के अध्यक्ष ईश्वर सिंह राठिया , प्रभारी प्रबंधक बृजभवन सिंह तंवर, सहकारी निरीक्षक एच के चौहान , पर्यवेक्षक मोहम्मद जमाल खान उपस्थित रहे।

👉वन विभाग ने अनुग्रह राशि में 25000 तत्काल प्रदान की

वन विभाग ने भी हाथी के हमले से होने वाली मौत पर दी जाने वाली 6 लाख रुपए की अनुग्रह राशि में से 25 हजार रुपए की सहायता राशि तत्काल प्रदान की है।

👉सीसीटीवी में कैद हुई दंतैल की एंट्री

घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। जिसने रोंगटे खड़े कर दिए। उपार्जन केंद्र में रात 1 बजकर 34 मिनट पर जैसे ही कुत्ता दौड़कर कैमरे से भागता है ,एक दंतैल हाथी प्रवेश करता है। जो कुछ ही सेकेंड में चिंघाड़ करते हुए फड़ के कर्मचरियों की ओर भागता है। इस हादसे ने सिस्टम सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

👉हाथी प्रभावित इन आधा दर्जन उपार्जन केंद्रों में 6.86 करोड़ के 28 हजार क्विंटल से अधिक धान जाम ,15 फरवरी तक डीओ कटने के बाद भी मिलर्स उठाव नहीं कर सके, रखवाली करने समिति कर्मचारियों के हाथ पांव फूल रहे!

गौरतलब हो कि कुदमुरा क्षेत्र में ही आधा दर्जन धान उपार्जन केंद्र हाथी प्रभावित हैं। इनमें लेमरू ,श्यांग ,चिर्रा , बरपाली (कोरबा), चचिया एवं कुदमुरा शामिल हैं। महज इन उपार्जन केंद्रों में ही जानकारी अनुसार 28 हजार 994 क्विंटल समर्थन मूल्य पर 6 करोड़ 86 लाख 86 हजार 786 रुपए का धान जाम पड़ा है। इनमें लेमरू में 3000 ,श्यांग में 18000, चिर्रा में 5000, बरपाली (कोरबा)में 16000क्विंटल ,चचिया में 230 एवं कुदमुरा में 1164 क्विंटल धान का उठाव शेष है। जहाँ जान हथेली पर लेकर कर्मचारी करोड़ों के शासकीय धान की रखवाली कर रहे। बीती रात कुदमुरा में हुए हादसों से सबके हाथ पांव फूल रहे।

15 फरवरी 100 % धान का तक डीओ कटने के बाद भी धान का उठाव न होना राइस मिलरों की शासकीय कार्य दायित्व के प्रति मनमानी को दर्शाता है। जिसमें संबंधितों पर नियममानुसार कार्रवाई होनी ही चाहिए।

👉फूड ऑफिसर ,डीएमओ,मिलर्स गैर जिम्मेदार , जिम्मेदारों पर दर्ज हो FIR …

जिले में लचर धान परिवहन व्यवस्था के कारण फड़ प्रभारी की हाथी के हमले से हुई मौत कोई सामान्य घटना नहीं है,यह शासन की धान परिवहन नीति ,सुरक्षा व्यवस्था के दावों पर गंभीर प्रह्नचिन्ह खड़े कर रही । लचर परिवहन नीति ,व्यवस्था का परिणाम बेकसूरों की मौत के रूप कैसे स्वीकार की जा सकती है।इसमें जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जिम्मेदारों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। इतनी बड़ी घटना पर मार्कफेड के अफसर डीएमओ एवं जिला खाद्य अधिकारी की मीडिया से संवादहीनता भी इनके गैर जिम्मेदारानापन को दर्शाता है। वैसे भी दोनों अफसरों के विरुद्ध समय समय पर शिकायतें मिलती रही है,लेकिन इस घटना ने शासन प्रशासन की नीति को कटघरे में ला खड़ा किया है।